राष्ट्रीय बाल पुरस्कार क्या है

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राष्ट्रीय बाल पुरस्कार क्या है

राष्ट्रीय बाल पुरस्कार क्या है :-
राष्ट्रीय बाल श्री सम्मान 09 से 16 वर्ष के आयु वर्ग के रचनात्मक बच्चों के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदत्त सम्मान है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (भारत सरकार ) के स्वायत्त निकाय द्वारा राष्ट्रीय बाल भवन द्वारा दिए जाने वाले सम्मान में एक पट्टिका, एक प्रमाण पत्र शैक्षिक संसाधन और नकद पुरस्कार सम्मिलित हैं। राष्ट्रीय बाल श्री सम्मान प्रायः नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है। बालश्री सम्मान भारत के ३ राष्ट्रपति पुरस्कारों में से एक है, बाल श्री देश का सर्वोच्च बाल पुरस्कार हैं।

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राष्ट्रीय बाल पुरस्कार इन क्षेत्रों में दिया जाता है :-
जो बच्चा भारत का नागरिक वह अपना रजिस्ट्रेशन कर सकता है. बता दें, भारत का कोई नागरिक ऐसे किसी बच्चे का रजिस्ट्रेशन कर सकता है जिसने समाज सेवा, शैक्षिक क्षेत्र, खेल, कला एवं संस्कृति में ऐसा काम किया हो जिसका सकारात्मक प्रभाव डाला हो |
विजेताओं को विभिन्न विषयों जैसे समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, गणित, विज्ञान, कला, संगीत और खेल के विशेषज्ञों की एक समिति तैयार की जाती है. जिसके महत्वपूर्ण विश्लेषण और मुश्किल प्रक्रिया के माध्यम से विजेता को चुना जाता है. जिसके बाद महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी की निगरानी में अंतिम सूची तैयार की जाती है |

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राष्ट्रीय बाल पुरस्कार की राशि कितनी होती है :-
व्यक्तिगत पुरस्कार हासिल करने वाले को 1,00,000 रुपये, मेडल , एक प्रशस्ति पत्र और एक सर्टिफिकेट दिया जाता है |
संस्था: संस्था के लिए 5,00,000 रुपये, मेडल , एक प्रशस्ति पत्र और एक सर्टिफिकेट दिया जाता है |
बहादुर बच्चों को मेडल, 1 लाख रुपये नकद राशि, 10 हजार रुपये का बुक वाउचर और सर्टिफिकेट मिलते हैं|

अब तक राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिए गए व्यक्तियों कि सूची :-
26 बच्चों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से नवाजा है. इस साल प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के कुल 783 आवेदन आए थे, जिसमें से 26 बहादुर बच्चों को चुना गया. ये पुरस्कार दो कैटेगरी में दिए जाते हैं पहला बाल शक्ति पुरस्कार और दूसरा बाल कल्याण पुरस्कार |
आपको बता दें, सरकारी संस्था इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर (आईसीसीडब्ल्यू) 1957 से ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ का वितरण कर रही थी, लेकिन वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने के चलते सरकार ने खुद को इससे अलग कर लिया है. जिसके बाद ऐसा पहली बार हो रहा जब 26 जनवरी को होने वाली परेड में बहादुर बच्चे दिखाई नहीं देंगे |

 

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