भारत के प्रधानमंत्री

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भारत के प्रधानमंत्री

भारत के प्रधान मंत्री क्या है :-
भारत का प्रधान मंत्री भारत सरकार की कार्यकारी शाखा का अध्यक्ष होता हैं। उनकी स्थित राष्ट्र के मुखिया भारत के राष्ट्रपति से भिन्न होती है। चूंकि भारत में अब वेस्टमिंस्टर प्रणाली के बाद से सरकार की संसदीय प्रणाली का पालन किया जाता है, इसलिए अधिकांश कार्यकारी शक्तियों का उपयोग प्रधान मंत्री द्वारा ही किया जाता है। प्रधान मंत्री राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार के रुप में कार्य करता है और ये मंत्रिपरिषद का नेता होता है। भारत के प्रधान मंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है और मंत्री परिषद की नियुक्त भी राष्ट्रपति के द्वारा ही प्रधान मंत्री की सलाह के आधार पर की जाती है। प्रधान मंत्री या तो लोक सभा का सदस्य होता हैं या फिर राज्य का सदस्य भी हो सकता है।

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भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति :-
प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। इस पद के लिए राष्ट्रपति को लोकसभा में बहुमतप्राप्त दल के नेता का ही चयन करना होता है। अगर बहुमत वाला दल न हो तो भी यदि बहुमत का विश्वास प्राप्त करने की स्थिति में हो तो भी उसे प्रधानमंत्री चुना जा सकता है, मगर उसे निर्धारित समय पर विश्वासमत हासिल करना होता है।

भारत के प्रधानमंत्री को कितन वेतन मिलत है :-
भारत के प्रधानमंत्री भारत सरकार की कार्यकारी शाखा के प्रमुख होते हैं भारत में वेस्टमिंस्टर प्रणाली के बाद संसदीय प्रणाली का अनुसरण किया जाता है, ज्यादातर कार्यकारी शक्तियों का उपयोग प्रधानमंत्री द्वारा होता है. राष्ट्रपति भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं और उनकी सलाह पर मंत्रिपरिषद नियुक्त किया जाता है प्रधानमंत्री लोकसभा या राज्य सभा का सदस्य हो सकता है. क्या आप जानते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री का मासिक वेतन कितना है आइये अध्ययन करते हैं |
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हैं और सबसे ताकतवर आदमी हमारे देश में प्रधानमंत्री को ही माना जाता है क्योंकि उनके हाथों में पूरे देश की बागडोर होती है यहीं आपको बता दें कि संविधान के अनुसार, भारत का प्रधानमंत्री, भारत सरकार का मुखिया, भारत के राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार, मंत्रिपरिषद का मुखिया, तथा लोकसभा में बहुमत वाले दल का नेता होता है. भारत कि राजनैतिक प्रणाली में, मंत्रिमंडल का वरिष्ठ सदस्य भी होता है |
भारत के संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, प्रधानमंत्री का वेतन संसद द्वारा तय किया जाता है और समय-समय पर संशोधित किया जाता है 31 जुलाई, 2012 को भारत के प्रधानमंत्री का मासिक वेतन और भत्ते रुपये थे 1,60,000, |

भारत के प्रधानमंत्री को पेंशन :-
भारत के पूर्व प्रधानमंत्रियों को प्रदान किया जाता है
– जीवन भर के लिए किराया-मुक्त आवास.
– चिकित्सा सुविधाएं, 14 सचिवीय कर्मचारी, वास्तविक व्यय के अलावा कार्यालय व्यय, छह एग्जीक्यूटिव-क्लास के फ्लाइट टिकट, इत्यादि.
– पहले पांच वर्षों के लिए मुफ्त ट्रेन यात्रा.
– एक वर्ष के लिए एसपीजी कवर.
– पांच साल के बाद: एक निजी सहायक और चपरासी, मुफ्त हवाई और रेल टिकट और कार्यालय खर्च के लिए 6,000 रु. |

भारत केअन्य मंत्रियों की नियुक्ति :-
राष्ट्रपति अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार करता है। किसी मंत्री को पद से हटाने की शक्ति का भी राष्ट्रपति वास्तव में प्रधानमंत्री की सलाह पर ही प्रयोग करता है। विभिन्न मंत्रियों के स्तर और उनकी संख्या का निश्चय भी प्रधानमंत्री करता है। उसी की सलाह के आधार पर ही राष्ट्रपति उनको उनकी पंक्ति निश्चित करता है। बाद में मंत्रियों के विभागों और काम काज का निर्धारण भी प्रधानमंत्री के ही हाथों में होता है। वह जब चाहे इनमें परिवर्तन कर सकता है।

भारत के प्रधानमंत्री का कार्यकाल और सेवानिवृत्ति की आयु :-
राष्ट्रपति के विपरीत, प्रधानमंत्री का निश्चित कार्यकाल नहीं होता है प्रधानमंत्री का पूरा कार्यकाल पांच साल का होता है, जो लोकसभा के सामान्य कार्यकाल के साथ मेल खाता है यदि प्रधानमंत्री निचले सदन में विश्वास मत खो देता है तो उनका कार्यकाल समाप्त हो सकता है इसलिए, यह कहा जा सकता है कि वह तब तक सत्ता में बने रहेंगे जब तक उन्हें लोकसभा का विश्वास प्राप्त है प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को पत्र लिखकर भी इस्तीफा दे सकते हैं |
प्रधानमंत्री के कार्यालय की कोई अवधि सीमा नहीं है कोई आधिकारिक सेवानिवृत्ति की आयु भी नहीं है |

भारत के प्रधानमंत्री की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां :-
– प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच का लिंक होता है प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेता होता है और राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच संचार माध्यम के रूप में कार्य करता है |
– विभागों का आवंटन करता है वह मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन करता है और विभिन्न मंत्रालयों और कार्यालयों के बीच काम वितरित करता है |
– मंत्रालयों का प्रभारी होता है प्रधानमंत्री के पास और भी विभागों के पोर्टफोलियो होते हैं जो कि अन्य मंत्रियों को आवंटित नहीं किए जाते हैं |
– कैबिनेट का नेता होता है प्रधानमंत्री कैबिनेट की बैठकों को बुलाते हैं और निर्धारित करते हैं कि किस प्रकार से व्यवसाय का लेन-देन किया जाएगा |
– संसद और मंत्रिमंडल के बीच की कड़ी होता है वह संसद में बहुमत में पार्टी के नेता के साथ संसद में सरकार के मुख्य प्रवक्ता होते हैं |
– आधिकारिक प्रतिनिधि प्रधानमंत्री विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों, उच्च-स्तरीय बैठकों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं और राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न अवसरों पर राष्ट्र को संबोधित भी करते हैं |
अंत में आपको बताते चले कि प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सैलरी ज्यादातर दान कर देते हैं जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब भी ऐसा किया करते थे. ऐसा भी कहा जाता है कि, जब उन्होंने मुख्यमंत्री का पद छोड़ा था तब 21 लाख रूपये उन्होंने गुजरात में बेटियों के नाम कर दिए थे साथ ही आपको जानकर हैरानी होगी कि जब से नरेंद्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला है तब से उन्होंने अभी तक कोई छुट्टी भी नहीं ली है
उम्मीद करते हैं कि आप जान गए होंगे कि भारत के प्रधानमंत्री का मासिक वेतन कितना है, रिटायरमेंट के बाद उनको क्या-क्या सुविधाएं दी जाती हैं |

भारत के प्रधानमंत्री कहां रहते हैं :-
भारतीय प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास 7, लोक कल्याण मार्ग है. यह उनका मुख्य कार्यस्थल भी है निवास का आधिकारिक नाम “पंचवटी” है यह 1980 के दशक में बनाया गया था. पूरा परिसर 12 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें पाँच बंगले हैं जब किसी व्यक्ति को नए प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाता है, तो उसका पूर्ववर्ती निवास खाली हो जाता है और अवलंबी को सलाह दी जाती है कि वह जल्द से जल्द अपने सरकारी आवास में चले जाएं |

भारत के प्रधानमंत्री को दी जाने वाली सुविधाएं :-
भारतीय प्रधान मंत्री को प्रदान की जाने वाली कुछ सुविधाएं निम्न हैं
7 रेस कोर्स रोड वाला आधिकारिक निवास: या “पंचवटी”
विशेष संरक्षण दल (एसपीजी) के व्यक्तिगत कर्मचारी जो उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं।
प्रधान मंत्री की कार (वर्तमान में बीएमडब्ल्यू 750i)
विशेष विमान (एयर इंडिया वन) |

भारत के प्रधान मंत्री के चयन की प्रक्रिया :-
संबिधान में कहा गया है कि पार्टी या गठबंधन के नेता का चनाव भारत के राष्ट्रपति, द्वारा किया जाता है,जो लोकसभा में बहुमत के साथ भारत के प्रधान मंत्री के रूप में हों। यदि कोई भी पार्टी या गठबंधन में मतदानों की संख्या अधिक नहीं होती, तो राष्ट्रपति सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन के नेता को प्रधान मंत्री के रुप में नियुक्त करता है। लेकिन उसे जितनी जल्दी हो सके संसद के निचले सदन के आत्मविश्वास को जीतना होता है।लोकसभा या राज्यसभा के सदस्य का चयन भी प्रधान मंत्री के रुप में किया जा सकता है।यदि वह संसद के सदन का सदस्य नहीं हैं तो नियुक्ति के छह महीने के अन्दर ही उसे सदन संसद की सदस्यता प्राप्त करनी होगी। प्रधान मंत्री के रूप में, वह सदन का नेता होता है, जिसका वह सदस्य भी होता है।

भारत के प्रधानमंत्री की अवधि और सेवानिवृत्ति का समय :-
राष्ट्रपति के विपरीत, प्रधान मंत्री का कोई एक निश्चित कार्यकाल नहीं है। लोकसभा के सामान्य कार्यकाल की तरह ही प्रधान मंत्री की पूर्ण कार्यकालीन अवधि भी पांच वर्ष है, हालांकि, यदि वह निचले सदन के विश्वास मत को खो देता है तो यह अवधि पहले भी खत्म हो सकती है। इसीलिए, यह कहा जा सकता है कि जब तक प्रधानमंत्री लोकसभा के विश्वास मत में है तब तक वह सत्ता में रह सकते है। प्रधान मंत्रीराष्ट्रपति को अपनी इच्छानुसार भी लिखित रूप से इस्तीफा दे सकता है।

भारत के प्रधानमंत्री के बारे में दिलचस्प तथ्य :-
जवाहरलाल नेहरू 1947 से स्वतंत्रता के बाद से सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय प्रधान मंत्री थे उनकी मृत्यु 1964 में हुई थी।
जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद गुलजारी लाल नंदा ने भारत के कार्यकारी प्रधान मंत्री के रूप में दो बार सेवा की।
1999 में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (बीबीसी) द्वारा आयोजित एक चुनाव में इंदिरा गांधी को “मिलेनियम की महिला” नाम दिया गया था।
भारत की प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी भारत रत्न प्राप्त करने वाली पहली महिला थीं। 2011 में इन्हें बांग्लादेश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार “बांग्लादेश स्वाधीनता सम्मन” से भी सम्मानित किया गया था।
मोरारजी देसाई भारत के पहले गैर-कांग्रेस प्रधान मंत्री थे तथा अपना कार्यकाल पूरा किए बिना इस्तीफा देने वाले भी पहले प्रधान मंत्री थे।
मोरारजी देसाई एकमात्र भारतीय प्रधान मंत्री हैं जिन्हें पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, निसान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया गया है।
राजीव गांधी सबसे कम उम्र के भारतीय प्रधान मंत्री थे, उन्होंने 40 साल की उम्र में ही प्रधानमंत्री के पद को संभाला था।
राजीव गांधी 7, रेस कोर्स में रहने वाले भारत के पहले प्रधान मंत्री थे।
पी.वी. नरसिम्हा राव दक्षिण भारत के पहले प्रधान मंत्री थे।
एच.डी. देवेगौड़ा भारत के पहले प्रधान मंत्री थे जो राज्यसभा के सदस्य थे।
डॉ. मनमोहन सिंह भारत में सबसे लंबे समय से सेवा करने वाले प्रधान मंत्री थे जो राज्य सभा (2004-2014) के सदस्य थे।
भारत के प्रधान मंत्री की सूची
1947 से आजादी के बाद से, भारत में अब तक विभिन्न 15 प्रधान मंत्री नियुक्त हो चुके हैं।जो भारत के शीर्ष पद पर विभिन्न राजनीतिक दलों से कई उत्कृष्ट नेता रह चुके हैं।उनमें से कुछ नेताओं ने पांच साल की अवधि तक सेबा की है, जबकि कई ने पांच साल से अधिक समय तक देश पर शासन किया।आइए भारत के 1947 से से लेकर वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सहित, प्रधानमंत्रियों की सूची देखें।

भारत के प्रधानमंत्री बनने के लिए योग्यता मापदंड :-
भारत के प्रधान मंत्री के पद के योग्य व्यक्ति होने के लिए, निम्न शर्तें है
भारत के नागरिक हो
लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य हो
यदि वह लोकसभा का सदस्य है तो उसकी उम्र 25 साल या उससे अधिक होनी चाहिए और यदि वह राज्यसभा का सदस्य हो तो उसे 30 साल का होनाआवश्यक है।
वह व्यक्ति भारत क प्रधान मंत्री नहीं बन सकता है जो भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अथवा किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के तहत किसी भी सरकार के अधीन रहकर लाभ का कोई पद रखता हो।

भारत के मंत्रियों के तीन स्तर :-
मंत्रिपरिषद में सभी मंत्री समान स्तर के नहीं होते। इसमें तीन स्तर के मंत्री रखे जाते हैं।
1-मंत्रिमंडलीय स्तर के मंत्री अर्थात कैबिनेट मंत्री
2-राज्यमंत्री स्तर के सदस्य
3-उपमंत्री स्तर के सदस्य

भारत के कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री में अंतर :-
मंत्रिमंडल के मंत्री यानि कैबिनेट मंत्री साधिकार मंत्रिमंडल में भाग लेते हैं, जबकि राज्यमंत्री या उपमंंत्री इसकी बैठक में भाग नहीं ले सकते। ये कैबिनेट मंत्री के सहायक के रूप में होते हैं। अगर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार वाला है तो , जब उसके विभाग से संबंधित कोई बात चर्चा की सूची में होने पर वह कैबिनेट की बैठक में हिस्सा ले सकता है।

भारत के उपमंत्री की भूमिका :-
उपमंत्री मंत्रालय के किसी विभाग का कार्य निपटाने हेतु मददगार होता है। मंत्रिमंडल के विचार-विमर्श में अर्थात कैबिनेट की बैठक में उसकी कोई भागीदारी नहीं होती। वैसे भारत में उपमंत्री की धारणा का प्रयोग किया ही नहीं जा रहा |

भारत के किस सदन का सदस्य मंत्री :-
मंत्री संसद के किसी भी सदन यानी लोकसभा या राज्यसभा से चुने जा सकते हैं। हालाँकि मंत्री बनने के लिए एेसा जरूरी नहीं है कि वह व्यक्ति लोकसभा या राज्य सभा का अनिवार्य रूप से सदस्य हो। किसी एेसे सदस्य को भी प्रधानमंत्री द्वारा मंत्री बनाया जा सकता है, जो किसी भी सदन का सदस्य नहीं है। लेकिन एसे व्यक्ति को छह महीने के अंदर किसी न किसी सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होगी।

भारत के सदन में मंत्री की स्थिति :-
चुने जाने के बाद वह किसी भी सदन में बोल सकता है, उसकी कार्यवाही में भाग ले सकता है। लेकिन किसी मुद्दे पर वोटिंग की स्थिति में वह सिर्फ अपने सदन में ही वोटिंग कर सकता है। जिस सदन का वह सदस्य नहीं होता, उसमें उसे मत देने का अधिकार नहीं होता है। अगर वह लोकसभा का सदस्य है तो वह सिर्फ लोकसभा में वोट डाल सकता है और अगर राज्यसभा का सदस्य है तो सिर्फ राज्यसभा के लिए वोट डाल सकता है।

भारत के मंत्री को सुविधाएं :-
प्रत्येक मंत्री को संसद सदस्यों को संदेय सुविधाएँ और भत्ते आदि तो मिलते ही हैं। इसके अलावा उन्हें अपनी पंक्ति के अनुसार मापमान से सत्कार और भत्ता मिलेगा और किरायामुक्त निवास भी मिलेगा।

भारत के प्रधानमंत्री से ज्यादा है इन 9 लोगों की सैलरी :-
– केंद्रीय कैबिनेट सचिव –
– 7वां वेतन आयोग लागू होने से पहले केंद्रीय कैबिनेट सचिव 90 हजार रुपए प्रति माह था जो अब 2.5 लाख रुपए (सभी भत्तों सहित) प्रतिमाह हो गई है।
– केंद्र सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी का वेतन-
– 1.25 लाख रुपए। केंद्र सरकार के सचिव का वेतन इससे पहले 80 हजार रुपए प्रति माह था।
– मुख्य चुनाव आयुक्त का वेतन-
– 2.5 लाख रुपए प्रति माह। वर्तमान में सीईसी का वेतन भी भी कैबिनेट सचिव के बराबर यानी 2.5 लाख रुपए प्रतिमाह है।
– मुख्य लेखा परीक्षक (सीएजी)-
– 2.5 लाख रुपए प्रति माह। प्रधानमंत्री से ज्यादा सैलरी पाने वाले अधिकारियों में से एक मुख्य लेखा परीक्षक (सीएजी) भी हैं।
– आरबीआई के गवर्नर का वेतन –
– 2.5 लाख रुपए। आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के अनुसार, 21 फरवरी को 2017 को आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के अनुसार, रिजर्व बैंक के गवर्नर का वेतन 2.5 लाख रुपए है जो कि 1 जनवरी 2016 से यह लागू हुआ है। इससे पहले गवर्नर का वेतन 90000 रुपए था।
– रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर-
– रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर का वेतन भी 1 जनवरी 2017 से 2.25 लाख रुपए हो गया है जो कि पहले 80000 रुपए प्रतिमाह था।
– सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का वेतन-
– 2.8 लाख रुपए। 26 मार्च 2017 को एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसमें मुख्य न्यायाधीश समेत अन्य न्यायाधीशों की सैलरी बढ़ाने का बात कही गई है। इस प्रस्ताव के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्याधीश का वेतन 2.8 लाख रुपए होगा।
– हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का वेतन-
– 2.5 लाख रुपए। होईकोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट जजों का वेतन स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, 2.5 लाख रुपए है। जोकि प्रधानमंत्री के वेतन से भी ज्यादा है।
– हाईकोर्ट के न्यायाधीशों का वेतन- 2.25 लाख रुपए।

भारत के पोर्टफोलियो का आवंटन :-
प्रधानमंत्री, मंत्रियों के बीच पोर्टफोलियो को आवंटित करता है और विभिन्न मंत्रालयों और कार्यालयों के बीच कार्य का वितरण करता है। यह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कार्य का समन्वय कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से करता है।

भारत के मंत्रालयों के प्रभारी :-
प्रधान मंत्री कुछ पोर्टफोलियोको अपने पास भी रखता है, जिन्हें यह अन्य मंत्रियों में आवंटित नहीं करता है। वह आम तौर पर निम्नलिखित मंत्रालयों / विभागों का प्रभारी होते हैं:
कार्मिक मंत्रालय, लोक शिकायत और पेंशन
योजना मंत्रालय
परमाणु ऊर्जा विभाग
अंतरिक्ष विभाग
कैबिनेट की नियुक्ति समिति
कैबिनेट का नेता:
कैबिनेट की बैठकों को प्रधान मंत्री के द्वारा बुलाया जाता है और प्रधानमंत्री ही इस बैठक की अध्यक्षता करता है और यह निर्धारित करता है कि इन बैठकों में कौन सा कार्य किया जाएगा।

भारत के संसद और कैबिनेट के बीच की कड़ी :-
प्रधान मंत्रीमंत्रिमंडल और संसद के बीच कड़ी के रुप में भी कार्य करता है। वह लोकसभा में बहुमत से पार्टी के नेता होने के साथ संसद में सरकार का मुख्य प्रवक्ता भी होता है। महत्वपूर्ण नीति निर्णयों की घोषणा करना भी प्रधान मंत्री की ही जिम्मेदारी होती है। प्रधान मंत्री सरकार की स्थिति या नीति को स्पष्ट करने के लिए संसद के सामान्य महत्वपूर्ण विचार-विमर्श में भी हस्तक्षेप कर सकता है।

भारत के आधिकारिक प्रतिनिधि :-
भारत के प्रधान मंत्री द्वारा विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों, उच्च स्तरीय बैठकों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया जाता है और प्रधानमंत्री ही देश को राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न अवसरों पर संबोधित करते हैं।

भारत के प्रधान मंत्री की शक्तियां / अधिकार :-
प्रधान मंत्री द्वारा उपयोग की जाने वाली विभिन्न शक्तियां और अधिकार निम्नानुसार है

भारत के शासन का मुखिया :-
भारत का प्रधान मंत्री सरकार का मुखिया होता है। हालांकि राष्ट्र का मुखिया राष्ट्रपति होता हैं, लेकिन अधिकतर कार्यकारी निर्णय प्रधान मंत्री के द्वारा ही लिए जाते हैं। भारत में महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली समितियां, जैसे केंद्रीय मंत्रिमंडल और योजना आयोग सभी प्रधानमंत्री की देख-रेख में ही चलती हैं।

भारत के मंत्रिपरिषद का नेता :-
जहां तक मंत्रिपरिषद के प्रधान मंत्री के संबंधों का संबंध है, उनकी स्थिति समूह में सर्वोच्च होती है। प्रधान मंत्री की मृत्यु या इस्तीफे की स्थिति में, मंत्रियों की पूरी परिषद को इस्तीफा देना पड़ता है। मंत्री सीधे प्रधान मंत्री को रिपोर्ट करते हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति द्वारा किसी मंत्री का इस्तीफा मांगकर या उसे बरखास्त करवाके हटा भी सकता है। यदि प्रधान मंत्री और किसी अन्य मंत्री के द्वारा दी गई राय में कोई अंतर उठता है, तो हमेशा प्रधान मंत्री की राय को प्रचलित किया जाता है।

भारत के संसद का नेता :-
प्रधानमंत्री सदन का नेता है जिससे वह संबधित है। वह सदन के विचार-विमर्श में तो भाग ले सकता हैलेकिन इसका वह सदस्य नहीं है। वह राष्ट्रपति को लोकसभा को भंग करने की सलाह भी दे सकता है।

भारत के राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच संबंध :-
प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष हैं और इनका कार्य राष्ट्रपति तथा मंत्रिपरिषद के बीच सूचनाओं को आदान-प्रदान करना होता है। प्रधान मंत्री का यह कर्तव्य होता है कि वह मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को प्रदान करें और साथ ही केंदीय प्रशासन या विधायिका के प्रस्ताव की जानकारी भी राष्ट्रपति को दे जो कि आवश्यक होती है|

भारत के प्रधानमंत्री की सूचि एंव कार्य काल :-
जवाहरलाल नेहरू (1889-1964) अगस्त 15, 1947 – मई 27, 1964
गुलजारी लाल नंदा (1898-1997) (कार्यवाहक) मई 27, 1964 – जून 9, 1964
लाल बहादुर शास्‍त्री (1904-1966) जून 09, 1964 – जनवरी 11, 1966
गुलजारी लाल नंदा (1898-1997) (कार्यवाहक) जनवरी 11, 1966 – जनवरी 24, 1966
इंदिरा गांधी (1917-1984) जनवरी 24, 1966 – मार्च 24, 1977
मोरारजी देसाई (1896-1995) मार्च 24, 1977 – जुलाई 28, 1979
चरण सिंह (1902-1987) जुलाई 28, 1979 – जनवरी14 , 1980
इंदिरा गांधी (1917-1984) जनवरी 14, 1980 – अक्टूबर 31 , 1984
राजीव गांधी (1944-1991) अक्टूबर 31, 1984 – दिसंबर 01, 1989
विश्वनाथ प्रताप सिंह (1931-2008) दिसंबर 02, 1989 – नवंबर 10, 1990
चंद्रशेखर (1927-2007) नवंबर 10, 1990 – जून 21, 1991
पी. वी. नरसिम्हा राव (1921-2004) जून 21, 1991 – मई 16, 1996
अटल बिहारी वाजपेयी (1926-2018) मई 16, 1996 – जून 01, 1996
एच. डी. देवेगौड़ा (1933) जून 01, 1996 – अप्रैल 21, 1997
इंद्रकुमार गुजराल (1933-2012) अप्रैल 21, 1997 – मार्च 18, 1998
अटल बिहारी वाजपेयी (1926-2018) मार्च 19, 1998 – अक्टूबर 13, 1999
अटल बिहारी वाजपेयी (1926-2018) अक्टूबर 13, 1999 – मई 22, 2004
डॉ. मनमोहन सिंह (जन्म-1932) मई 22, 2004 – मई 26, 2014
नरेन्द्र मोदी (जन्म-1950) मई 26, 2014 – वर्तमान तक |

भारत के प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना का कैसे उठायें लाभ :-
प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना के पोर्टल को गरीब छात्रों को खास तौर पर ध्यान में रखकर विकसित किया गया है |
पैसे की दिक्कत की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं कर पाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना लॉन्च की है योजना के तहत स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़ी हर जानकारी एक प्लेटफ़ॉर्म पर मिलती है इस पोर्टल पर एजुकेशन लोन के कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म (CAF) भी उपलब्ध हैं इनकी मदद से पढ़ाई के लिए लोन या स्कॉलरशिप पाने के लिए आवेदन किया जा सकता है लोन और स्कॉलरशिप से जुड़ी शिकायतें भी इस पोर्टल के माध्यम से की जा सकती हैं प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना? अब तक देश के 13 बैंकों ने इस पोर्टल पर एजुकेशन लोन की 22 स्कीम पंजीकृत की है. इनमें SBI, आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक शामिल हैं इस पोर्टल का डेवलपमेंट और मेंटनेंस एनएसडीएल ई-गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर करती है इस पोर्टल को खास तौर पर गरीब छात्रों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है पैसे की दिक्कत की वजह से कई बार छात्रों को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती थी इस योजना के तहत आने वाले वक्त में छात्रों से संबंधित हर तरह की योजनाओं को जोड़ दिया जायेगा. ऑनलाइन वेबसाइट की मदद से लोन और स्कॉलरशिप की प्रक्रिया पूरी होने से सिस्टम में पारदर्शिता भी आएगी प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना के तहत छात्रों को सिर्फ एक फार्म भरना होता है योजना के तहत एजुकेशन लोन पर ब्याज दर सभी बैंकों में अलग-अलग है. बैंकों के ब्याज दर की जानकारी के लिए छात्रों को पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा |

भारत के प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना पोर्टल की खासियत :-
विद्या लक्ष्मी योजना पोर्टल की खासियत शिक्षा लोन के लिए आवेदन करने की सुविधा योजना के तहत लोन आवेदन की स्थिति को देखने के लिए डैशबोर्ड की सुविधा छात्र-छात्राओं के लिए एजुकेशन लोन से संबंधित सवाल एवं शिकायत हेतु ईमेल की सुविधा बैंकों के लिए लोन प्रक्रिया की मौजूदा स्थिति को अपलोड करने की सुविधा बैंकों की शिक्षा लोन एवं अन्य स्कीम की एक ही जगह जानकारी सरकार द्वारा देश भर के छात्र-छात्राओं की सूचना एवं योजनाओं में आवेदन के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल को इससे जोड़ना सभी बैंकों में एक प्लेटफ़ॉर्म से एजुकेशन लोन के लिए आवेदन करने की सुविधा |

भारत के प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना के लाभ :-
विद्या लक्ष्मी योजना के लाभ विद्या लक्ष्मी योजना की मदद से छात्र अपनी शिक्षा जारी रख सकेंगे. योजना के तहत छात्र पोर्टल के माध्यम से 13 बैंकों की 22 तरह के लोन का लाभ उठा सकेंगे अपनी सुविधा/जरूरत के हिसाब से लोन ले सकेंगे बैंक द्वारा पोर्टल पर लोन से संबंधित जानकारी के साथ स्कॉलरशिप की जानकारी भी अपलोड की जाएगी. लोन लेने के लिए एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म की वजह से छात्रों को एजुकेशन लोन के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा

भारत के प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना में लोन के लिए कैसे करें आवेदन :-
विद्या लक्ष्मी योजना में लोन के लिए आवेदन करने के लिए पोर्टल पर जाना होगा. इस लिंक पर क्लिक करें : https://www.vidyalakshmi.co.in/Students/
इस लिंक पर आपको रजिस्टर करने के बाद ही लोन के लिए आवेदन करने का मौका मिलेगा. https://www.vidyalakshmi.co.in/Students/signup
विद्या लक्ष्मी योजना में रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद आपको एक इमेल आईडी एवं पासवर्ड मिलेगा |

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