भारत में केंद्र शासित प्रदेशों और प्रशासकों की सूची

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भारत में केंद्र शासित प्रदेशों और प्रशासकों की सूची

भारत में केंद्र शासित प्रदेश :-
केन्द्र शासित प्रदेश या संघ-राज्यक्षेत्र या संघक्षेत्र भारत के संघीय प्रशासनिक ढाँचे की एक उप-राष्ट्रीय प्रशासनिक इकाई है। भारत के राज्यों की अपनी चुनी हुई सरकारें होती हैं, लेकिन केन्द्र शासित प्रदेशों में सीधे-सीधे भारत सरकार का शासन होता है। भारत का राष्ट्रपति हर केन्द्र शासित प्रदेश का एक ‘सरकारी प्रशासक’ या ‘उप राज्यपाल’ नामित करता है।

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भारत में राष्टपति द्वारा केंद्र शासन :-
केंद्र शासित प्रदेशों का शासन राष्ट्रपति द्वारा चलाया जाता है और वह इस बारे में जहाँ तक उचित समझेंअपने द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से कार्य करता है। अंडमान-निकोबार, दिल्ली और पांडिचेरी के प्रशासकों को उपराज्यपाल कहा जाता है, जबकि चंडीगढ़ का प्रशासक हैं। दादरा और नगर हवेली का प्रशासक दमन और दीव का कार्य भी देखता है। लक्षद्वीप का अलग प्रशासक है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्रशासित प्रदेश पांडिचेरी की अपनी-अपनी विधानसभाएँ और मंत्रिपरिषद हैं। पांडिचेरी विधानसभा संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-II में और III में निहित, केंद्रशासित प्रदेशों से संबद्ध मामलों के बारे में, जहाँ तक के मामले केंद्रशासित क्षेत्र पर लागू होते हैं, क़ानून बना सकती है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधान सभा को भी संविधान की अनुसूची-II की प्रविष्टि 1,2 और 18 को छोड़कर, ये सभी शक्तियाँ प्राप्त हैं। कुछ विशेष विधेयकों के लिए केंद्र सरकार की अग्रिम स्वीकृति लेना भी अनिवार्य है। केन्द्रशासित प्रदेश पांडिचेरी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधान सभाओं द्वारा पारित कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ और मंजूरी देने के लिए रोक लिया जाता है।

भारत में केंद्र शासित प्रदेश में समाज एवं संस्कृति :-
राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते यहाँ का समाज विभिन्न प्रान्तों तथा वर्गों से आने वाले भिन्न भाषा-भाषी लोगों के मिलने से बना है। जिनके परम्परा, पहनाबा, ओढ़ाबा विश्वास-मत आदि अलग-अलग हैं। यह विविधता प्रदेश के समाज को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। प्रदेश की संस्कृति राष्ट्रीय संस्कृति की प्रतिनिधि प्रतीत होती है। प्रदेश में लगभग सभी धर्म और सम्प्रदाय से जुड़े सांस्कृतिक धरोहर मौजूद हैं।

भारत के प्रमुख केंद्र शासित प्रदेश :-
भारत में सात सुंदर संघ या केंद्र शासित प्रदेश हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा संचालित किए जाते हैं। उद्योग और पर्यटन के लिए भारत के ये केंद्र शासित प्रदेश तेजी से विकसित हो रहे हैं। दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली अपने उत्कृष्ट समुद्र तटों, पुर्तगाली चर्चों और किलों के लिए प्रसिद्ध हैं। आइए जानते है भारत के 9 केंद्र शासित प्रदेशो के बारे एवं वहाँ के खूबसूरत पर्यटन स्थलो के बारे मे कुछ रोचक तथ्य |
सन् 1956 में दिल्ली को एक केंद्रीय क्षेत्र में बदल दिया गया , आज दिल्ली भारत का एक सबसे बड़ा मेट्रो शहर है और आबादी के आधार पर दुनिया का आठवां बड़ा हिस्सा है. दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र मे नोएडा, गुड़गांव, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद शामिल हैं एवं दिल्ली में कई पर्यटक आकर्षण हैं जैसे कि ज़मीन के अंदर बना हुआ पालिका बाज़ार, भारत का अजूबा कमल मंदिर, जामा मस्जिद, अक्षरधाम मंदिर, लाल जैन मंदिर और दिल्ली का प्रशिद्ध सीमा चिन्ह द इंडिया गेट |

भारत में केंद्र शासित प्रदेश में प्रशासन :-
दिल्ली पर विधिवत् शासन की शुरुआत अंग्रेज़ों द्वारा 1805 में शुरू की गई। प्रारम्भ में प्रशासनिक नियंत्रण ब्रिटिश शासन के प्रतिनिधि एवं मुख्य आयुक्त के अधीन था। 1857 तक सामान्य अधिनियमों के द्वारा ही कुछ फेर-बदल के साथ प्रशासन चलता रहा। 1858 में अंग्रेज़ों द्वारा दिल्ली को सीमान्त प्रान्त के प्रान्तीय शहर का दर्जा दिया गया। बाद में इस उपराज्यपाल के अधीन नवगठित पंजाब प्रान्त में स्थानान्तरित कर दिया गया। राजधानी का कलकत्ता से दिल्ली स्थानान्तरित होने के बाद यहाँ के प्रशासनिक कार्यों की देखरेख के लिए इम्पोरियल दिल्ली समिति का गठन किया गया। 1916 में इस समिति को पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट 1911 के तहत रायसीना म्यूनिसिपल समिति के रूप में अधिसूचित किया गया। 16 मार्च 1927 को इसे दिल्ली म्यूनिसिपल समिति के रूप में पुनर्गठित किया गया। 1932 में प्रथम श्रेणी का म्यूनिसिपैलिटी का दर्जा प्रदान किया गया। नई दिल्ली नगर परिषद् अधिनियम, 1994 के अंतर्गत नई दिल्ली नगर समिति का पुनर्गठन किया गया। दिल्ली को 1951 में भाग ‘ग’ राज्यों में शामिल किया गया, जिसमें मंत्रिपरिषद् और विधायिका का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया। 1957 में संसद द्वारा पारित दिल्ली नगर अधिनियम के तहत निगम के गठन के उद्देश्य से 1958 में चुनाव करवाये गये। 1957 में ही दिल्ली विकास अधिनियम पारित हुआ जिसके तहत दिल्ली विकास प्राधिकरण की स्थापना हुई। प्राधिकरण द्वारा पहला मास्टर प्लान (1961-81) 1962 में प्रकाशित किया गया। दिल्ली प्रशासन अधिनयम, 1966 द्वारा महानगर परिषद् (56 निर्वाचित + 5 मनोनीत सदस्य) के गठन का प्रावधान कर दिल्ली में सीमित प्रतिनिधित्व वाली सरकार की स्थापना की गई। संविधान में 69वें संविधान संशोधन द्वारा दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम, 1991 प्रभाव में आया। 1992 से लागू इस अधिनियम के तहत एक विधानसभा तथा दिल्ली के प्रशासन-संचालन के लिए एक उपराज्यपाल तथा उनको इस विषय में सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री के अधीन मंत्रीपरिषद् का प्रावधान किया गया। इस अधिनियम द्वारा विधानसभा को राज्य सम्बन्धी मामलों एवं केन्द्र शासित क्षेत्रों के मुतल्लिक मामलों पर क़ानून बनाने का अधिकार दिया गया। लेकिन क़ानून व्यवस्था, पुलिस एवं भूमि सम्बन्धी विषय विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखे गए। 1993 के चुनाव के पश्चात् इस अधिनयम के तहत पहली विधानसभा का गठन किया गया। नवम्बर 1998 में दूसरी विधानसभा का गठित की गई। जनवरी 1997 से पूर्व दिल्ली केवल एक ज़िला था, लेकिन वर्तमान में यहाँ 9 ज़िले तथा 27 सबडिवीजन/तहसील हैं।
विधानमण्डल – एक संदनात्मक (विधानसभा)
विधानसभा सदस्यों की संख्या – 70
लोकसभा सदस्यों की संख्या – 7
राज्य सभा के सदस्यों की संख्या – 3

भारत के संघ शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर और प्रशासकों की सूची :-
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत के राज्यों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. ये श्रेणियां हैं राज्य क्षेत्र, केंद्र शासित प्रदेश और अर्जित राज्य क्षेत्र वर्तमान में भारत में 29 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं लेकिन अर्जित राज्य एक भी नहीं है भारत के 7 केंद्र शासित प्रदेशों में से 4 का शासन प्रशासक के द्वारा चलाया जाता है जबकि 3 का शासन लेफ्टिनेंट गवर्नर के माध्यम से किया जाता है |
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत के राज्यों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. ये श्रेणियां हैं; राज्य क्षेत्र, केंद्र शासित प्रदेश और अर्जित राज्य क्षेत्र. वर्तमान में भारत में 29 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं लेकिन अर्जित राज्य एक भी नहीं है. भारत के 7 केंद्र शासित प्रदेशों में से 4 का शासन प्रशासक के द्वारा चलाया जाता है जबकि 3 का शासन लेफ्टिनेंट गवर्नर के माध्यम से किया जाता है |
संघ शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर और प्रशासक संबंधित संघ शासित प्रदेश में भारत के राष्ट्रपति के प्रतिनिधि होते हैं ना कि राज्यपाल की तरह राज्य प्रमुख और राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत ही कार्य करते हैं अर्थात लेफ्टिनेंट गवर्नर और प्रशासक की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है |
भारत के सभी राज्य भारत की संघीय व्यवस्था के सदस्य हैं और वे केंद्र के साथ शक्ति के विभाजन के सहयोगी हैं हालाँकि यह नियम संघ शासित प्रदेशों के लिये लागू नहीं होता है क्योंकि संघ शासित प्रदेश, सीधे केंद्र के नियंत्रण में होते हैं. यही कारण है कि इनको संघ शासित प्रदेश कहा जाता है |

राजनैतिक कारणों से बने केंद्रशासित प्रदेश :-
नई दिल्ली को किसी राज्य से अलग उसी प्रकार रखा गया है जैसे अमेरिका में राजधानी वाशिंगटन डीसी को रखा गया है। 1956 से 1991 तक नई दिल्ली भी केंद्र शासित प्रदेश ही था लेकिन 1991 में 69वे संविधान संशोधन से राष्ट्रीय राजधानी प्रदेश (NCT) का दर्जा प्राप्त हुआ है और इसे भी पुड्डुचेरी की तरह स्वयं के मंत्रिमंडल व मुख्यमंत्री की व्यवस्था मिली है, यहाँ भी उपराज्यपाल(एलजी) की नियुक्ति होती है जो केंद्र सरकार करती है। कुल मिलाकर उपराज्यपाल(एलजी) और मंत्रिमंडल के सामंजस्य से यह चलता है।
नई दिल्ली की तरह चंडीगढ़ की भी स्थिति है। यह 1966 तक पंजाब की राजधानी था लेकिन 1966 में हरियाणा का गठन होने के बाद, पंजाब और हरियाणा दोनों चंडीगढ़ को अपनी राजधानी बनाना चाहते थे और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था। ऐसे में चंडीगढ़ को एक केंद्र शासित प्रदेश बनाकर दोनों राज्यों की राजधानी बना दिया गया।

भौगोलिक दूरी के कारण बने केंद्रशासित प्रदेश :-
सबसे पहले बात करेंगें भौगोलिक दूरी के कारण बने केंद्र शासित प्रदेशों की तो इसमें अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह व लक्षद्वीप दो केंद्रशासित प्रदेश आते हैं। भारत की मुख्य प्रायद्वीपीय सतह से दूर होने के कारण इन्हें किसी प्रदेश द्वारा संचालित करना काफी मुश्किल काम है और क्षेत्रफल के लिहाज से छोटा होने का कारण इसे एक राज्य भी नहीं बनाया जा सकता। यही कुछ कारण हैं, जिससे इन्हें केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है।

सांस्कृतिक विविधताओं की वजह से बने केंद्रशासित प्रदेश :-
सांस्कृतिक विविधताओं की वजह से बने केंद्र शासित प्रदेशों में दमन व दीव और दादर व नगर हवेली और पुडुचेरी शामिल हैं। दरअसल इन तीनों जगहों पर लंबे समय तक यूरोपीय देशों पुर्तगाल और फ्रांस का राज रहा था इसलिए यहाँ की संस्कृति उनसे मेल खाती है और इसलिए इनकी सांस्कृतिक विविधता बनाए रखने के लिए इन्हें किसी राज्य के साथ ना मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया।

भारत के 7 संघ शासित प्रदेशों की सूची :-
1. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: स्थापना:-1956
2. पुदुचेरी, स्थापना:-1966
3. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, स्थापना:-1956
4. लक्षद्वीप, स्थापना:-1956
5. दमन एवं दीव, स्थापना:-1962
6. चंडीगढ़, स्थापना:-1966
7. दादरा एवं नगर हवेली, स्थापना:-1961

भारत में क्यों बनाना पड़ता है केंद्र शासित प्रदेश :-
भारत में केंद्र शासित प्रदेश क्यों बनाये गए हैं इसका कोई स्पष्ट एक कारण नही है बल्कि इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं जैसे छोटा आकार और कम जनसंख्या, अलग संस्कृति, अन्य राज्यों से दूरी, प्रशासनिक महत्व, स्थानीय संस्कृतियों की सुरक्षा करना, शासन के मामलों से संबंधित राजनीतिक उथल-पुथल को दूर करना और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थिति आदि। आइये अब इन सभी कारणों की विस्तार में चर्चा करते हैं।

भारत के सभी केंद्र शासित प्रदेशों की सूची :-
केंद्र शासित प्रदेश लेफ्टिनेंट गवर्नर और प्रशासक
दादरा और नगर हवेली श्री प्रफुल पटेल (प्रशासक)
चंडीगढ़ श्री वी.पी. सिंह बदनौर (प्रशासक)
दमन और दीव श्री प्रफुल पटेल (प्रशासक)
लक्षद्वीप श्री फारूक खान, आईपीएस, (सेवानिवृत्त) (प्रशासक)
दिल्ली (NCT) श्री अनिल बैजल (लेफ्टिनेंट गवर्नर)
अंडमान और निकोबार द्वीप एडमिरल डी के जोशी (लेफ्टिनेंट गवर्नर)
पुडुचेरी डॉ किरण बेदी, आईपीएस, (सेवानिवृत्त) (लेफ्टिनेंट गवर्नर)
यहां उल्लेख करना जरूरी है कि ज्यादातर केंद्र शासित प्रदेशों में भारतीय प्रशासनिक सेवा से सम्बन्ध रखने वाले लोग ही इन संघीय प्रदेशों के प्रशासक या लेफ्टिनेंट गवर्नर बनते हैं लेकिन 1985 से पंजाब का राज्यपाल ही चंडीगढ़ का पदेन प्रशासक होता है |
वर्तमान में प्रफुल पटेल, दादरा & नगर हवेली और दमन & दीव दोनों संघीय प्रदेशों के प्रशासक का प्रभार सम्भाल रहे हैं. ऐसी नियुक्ति करने की शक्ति राष्ट्रपति के पास ही है |

भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के तथ्यों पर नजर :-
भारतीय राज्यों के पुनर्गठन के समय, भारत में 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश थे लेकिन अब भारत में 29 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं। विविधता के कारण अब भी भारत को राज्यों का संघ कहा जाता है और एकजुटता ने भारत को विविधता में एकता का उत्कृष्ट उदाहरण बना दिया है।
पंडित नेहरू के विजन के आलोक में, भारत को राष्ट्र पुनर्गठन अधिनियम 1956 के भाग – III के अनुसार पांच क्षेत्रीय परिषदों में बांटा गया है। इनमें से प्रत्येक क्षेत्रीय परिषदों की वर्तमान संरचना इस प्रकार है–
उत्तरी क्षेत्रीय परिषद
केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद
पूर्वी क्षेत्रीय परिषद
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद

General Notes

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