अक्षांश रेखाएं एवं देशांतर रेखाएं

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अक्षांश रेखाएं एवं देशांतर रेखाएं

प्रिय मित्रों, आज की इस पोस्ट में हम बात करने वाले हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान के एक चैप्टर भूगोल से संबंधित कुछ टॉपिक के बारे में जो कि काफी महत्वपूर्ण है, आज हम बात करेंगे, कि पृथ्वी की अक्षांश रेखाएं और देशांतर रेखाएं क्या होती है और इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य क्या क्या है , पृथ्वी- हम जानते हैं, कि हमारी पृथ्वी एक गोलाकार पिंड है। जो कि सूर्य के चारों ओर दीर्घ वृत्ताकार मार्ग में गति करती है। पृथ्वी अपने अक्ष में साढे 23 डिग्री झुकी हुई है, और इस झुकाव के कारण ही पृथ्वी में मौसम बदलते है। प्रारंभ में जब हमारे पास इतनी आधुनिक तकनीक नहीं थी। तब पृथ्वी में स्थित किसी स्थान की स्थिति निर्धारित करने के लिए और किसी निश्चित स्थान पर समय कितना हो रहा है, यह ज्ञात करना काफी कठिन था। इसीलिए पृथ्वी को अक्षांश एवं देशांतर रेखाओं में बांटा गया।

अक्षांश रेखाएं एवं देशांतर रेखाएं :- अक्षांश रेखाएं- ग्लोब में या मान लीजिए पृथ्वी पर, खींची गई पूर्व से पश्चिम ऐसी रेखाएं जो परस्पर समांतर है। उन्हें अक्षांश रेखाएं कहते हैं। यह रेखाएं पूर्णता काल्पनिक होती है, अक्षांश रेखाओं का महत्व- यह रेखाएं मुख्यता पृथ्वी को अलग-अलग भागों में बांट देती है, एवं इन भागो के जरिए हम किसी स्थान का पता लगा सकते हैं, या ग्राफ में दर्शा सकते हैं, कि वह स्थान कहां पर है अर्थात अक्षांश रेखाओं का मुख्य महत्व ग्लोब का मानचित्र में स्थिति दर्शाने का होता है।

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अक्षांश रेखाओं से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य :- पृथ्वी में कुल 180 अक्षांश रेखाएं खींची गई है जो उत्तरी गोलार्ध से लेकर दक्षिणी गोलार्ध तक है, यह रेखाएं परस्पर समांतर है, वह अक्षांश रेखा जो पृथ्वी को ठीक मध्य से काटती है, और पूर्व एवं पश्चिम दिशा में होती है उसे 0° अक्षांश रेखा या भूमध्य रेखा कहते हैं, भूमध्य रेखा को विषुवत रेखा के नाम से भी जाना जाता है, वह अक्षांश रेखा जो भूमध्य रेखा से 23.5 डिग्री उत्तर की ओर समांतर गुजरती है, उसे कर्क रेखा या कर्क अक्षांश रेखा कहते हैं, वह अक्षांश रेखा जो भूमध्य रेखा से 23.5 डिग्री दक्षिण की ओर समानांतर गुजरती है, उसे मकर रेखा या मकर अक्षांश रेखा कहते हैं, इसी तरह वह अक्षांश रेखा जो भूमध्य रेखा से 66.5 डिग्री उत्तर की ओर समानांतर गुजरती है, उसे आर्कटिक रेखा या आर्कटिक अक्षांश रेखा कहते हैं, एवं वह अक्षांश रेखा जो भूमध्य रेखा से 66.5 डिग्री दक्षिण की ओर समानांतर गुजरती है, उसे अंटार्कटिक रेखा या अंटार्कटिक अक्षांश रेखा कहते हैं, भूमध्य रेखा के ऊपर मतलब उत्तर की ओर का भाग उत्तरी गोलार्ध कहलाता है, एवं भूमध्य रेखा के नीचे मतलब दक्षिण की ओर का भाग दक्षिणी गोलार्ध कहलाता है, किन्ही दो अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी अर्थात एक अंश 111 किलोमीटर के बराबर होता है।
देशांतर रेखा- पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली रेखाओं को देशांतर रेखा कहते हैं। देशांतर रेखाएं ध्रुवों के समीप आपस में पास-पास होती है, वही भूमध्य रेखा में एक देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी सबसे अधिक होती है।

देशांतर रेखाओं का महत्व :- देशांतर रेखाएं मुख्यता किसी स्थान का समय दर्शाने के लिए मानी गई है, इन रेखाओं की सहायता से हम सरलता से समझ सकते हैं, कि किसी पृथ्वी के स्थान पर समय क्या है? इन विभिन्न देशांतर रेखाओं में से एक देशांतर रेखा को मुख्य प्रधान देशांतर रेखा माना जाता है, इसे शून्य अंश देशांतर रेखा भी कहते हैं। और यह रेखा लंदन के ग्रीनविच वेधशाला से होकर गुजरती हुई, उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से जोड़ती है। इस रेखा के अंतर्गत आने वाले टाइम जोन में समय 00:00 माना गया है, इस देशांतर रेखा के दाई ओर की रेखा पूर्वी देशांतर रेखाएं कहलाती है। मुख्य देशांतर रेखाओं से पूर्वी देशांतर रेखा की ओर जाने पर समय को धनात्मक लिया जाता है। इसी तरह देशांतर रेखा के बाई और की रेखा पश्चिमी देशांतर रेखा कहलाती है, और मुख्य देशांतर रेखा से पश्चिमी देशांतर रेखा की ओर जाने पर समय को ऋणात्मक माना जाता है। उदाहरण के लिए हमारे भारत देश से होकर गुजरने वाली देशांतर रेखा मुख्य देशांतर रेखा से 82.5 डिग्री पूर्वी और है, जिस कारण भारत देश का समय मुख्य देशांतर रेखा के समय जोन से 5:30 घंटे अधिक है, इस प्रकार मुख्य देशांतर रेखा को आधार मानकर विभिन्न देशांतर रेखाओं के अंतर्गत आने वाले स्थानों का समय निर्धारित किया जाता है।

देशांतर रेखाओं के महत्वपूर्ण तथ्य :- संपूर्ण पृथ्वी की देशांतर रेखाओं को 360 भागो 360 अंश देशांतर में बांटा गया है, पृथ्वी 24 घंटे में 360 अंश घूमती है इस कारण पृथ्वी 1 घंटे में अपने अक्ष पर 15 अंश घूमेगी, पृथ्वी को एक अंश घूमने के लिए लगभग 4 मिनट का समय लगता है, दो देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी या एक अंश देशांतर विषुवत रेखा में 111.32 किलोमीटर होती है, दो देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी गोरे कहलाती है।
अक्षांश रेखाएं एवं देशांतर रेखाएं
पृथ्वी की अक्षांश रेखाएं :- भूमध्य रेखा के समांतर खींची गई काल्पनिक रेखाएं हैं। इन्हें एक कोण के रूप में मापा जाता है जिसका, शीर्ष पृथ्वी के केंद्र पर मौजूद होता है, भूमध्य रेखा 0° अक्षांश को दर्शाता है, जबकि उत्तरी ध्रुव 90° उत्तरी अक्षांश और दक्षिण ध्रुव 90° दक्षिणी अक्षांश को दर्शाता है, 23½° उत्तर कर्क रेखा को दर्शाता है जबकि 23½° द. मकर रेखा को दर्शाता है, 66½° उ. आर्कटिक वृत्त को दर्शाता है जबकि 66½ द.अंटार्कटिक वृत्त को दर्शाता है, भूमध्य रेखा सहित कुल 181 अक्षांश हैं। प्रत्येक अक्षांश रेखा एक वृत्त है, लेकिन वे समान नहीं हैं, ध्रुव की ओर ये वृत्त छोटे होते जाते हैं। भूमध्य रेखा पृथ्वी के सतह पर खींचा जा सकने वाला ‘सबसे बड़ा वृत्त’ है, जिसे पृथ्वी की सतह पर खींचा जा सकता है, किसी भी दो अक्षांश रेखा के बीच की दूरी हमेशा समान होती है, 1 डिग्री अक्षांश = 111 किमी.
अक्षांश रेखाएं एवं देशांतर रेखाएं
पृथ्वी की देशांतर रेखाए :- यह पृथ्वी के बिलकुल केंद्र से कोणीय दूरी है। ग्लोब पर, देशांतर रेखाओं को अर्धवृत्तों की श्रृंखला के रूप में खींचा जाता है, जो उत्तरी ध्रुव से भूमध्य रेखा के माध्यम से दक्षिण ध्रुव तक विस्तृत होते हैं। उन्हें मध्याह्न रेखाएं भी कहा जाता है, किसी भी दो देशांतर रेखा के बीच की दूरी बराबर नहीं होती है, भूमध्य रेखा पर, 1 डिग्री = 111 किमी। 30 डिग्री N या S में, यह 96.5 किमी है। यह इस प्रकार यह कम होता जाता है, जब तक कि यह पोल पर शून्य हो जाता है, कुल 360 देशांतर रेखाएं हैं। प्रधान मध्याह्न 0° देशांतर रेखा है, जो लंदन के पास ग्रीनविच के पर रॉयल वेधशाला (Royal Observatory) से होकर गुजरती है।
भूगोलविदों द्वारा पृथ्वी को पूर्वी और पश्चिमी गोलार्धों में विभाजित करने के लिए इसे माना गया है, प्रत्येक देशांतर रेखा एक अर्द्धवृत्त है। 180 डिग्री देशांतर रेखा (अंतर्राष्ट्रीय दिनांक रेखा) 0 डिग्री देशांतर रेखा के ठीक विपरीत स्थित है। ऐसे बिंदुओं को प्रतिमुखी बिंदु (एंटिपोडल पॉइंट) कहा जाता है, पृथ्वी को 24 देशंतारीय क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, प्रत्येक एक दूसरे से 15° की दूरी पर है। प्रत्येक 15° स्थानीय समय में एक घंटे का अंतर हो जाता है। (4 मिनट / डिग्री)।

देशांतर रेखाएं और समय :- एक ही देशांतर रेखा में स्थित स्थानों का स्थानीय समय (सूर्य) समान होता है। चूंकि पृथ्वी 24 घंटे में 360 डिग्री का एक चक्कर पूरा करती है, यह एक घंटे में 15 डिग्री या 4मिनट में 1 डिग्री घूमती है, पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, इसलिए ग्रीनविच के पूर्व में स्थित स्थानों पर सूर्य पहले दिखता है और समय आगे होता है, जबकि ग्रीनविच के पश्चिम में स्थित स्थानों पर सूर्य बाद में दिखता है और समय पीछे होता है, भारत, जिसका देशान्तारीय विस्तार लगभग 30 डिग्री है, ने मानक समय के लिए 82 ½° पूर्व देशांतर को चुनकर केवल एक समय क्षेत्र को अपनाया है, जो जीएमटी (ग्रीनविच मीन टाइम) से 5 घंटे और 30 मिनट आगे है।

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा :- यह प्रशांत महासागर पर मौजूद 180° देशांतर रेखा है,यह अल्यूशियन द्वीप समूह, फिजी, सामोआ और गिल्बर्ट आइलैंड्स में अपने सीधे मार्ग से विचलित हो जाता है। यह एक ज़िग-ज़ैग रेखा है, पश्चिम से पूर्व की ओर तिथि रेखा को पार करने वाले यात्री (अर्थात; जापान से यूएसए) एक दिन दोहराते हैं और इसे पूर्व से पश्चिम की ओर (अर्थात संयुक्त राज्य अमेरिका से जापान तक) पार करने वाले वाले यात्री एक दिन खो देता है।

महत्वपूर्ण अक्षांश रेखाएं :- कर्क रेखा यह उत्तरी गोलार्ध में भूमध्य रेखा से 23 ½ ° (23 ° 30′ N) की कोणीय दूरी पर स्थित है, मकर रेखा: यह दक्षिणी गोलार्ध में भूमध्य रेखा से 23 ½°(23°30’S) की कोणीय दूरी पर स्थित है, आर्कटिक वृत्त: यह भूमध्य रेखा से उत्तर में 66 ½°(66°30’N) की कोणीय दूरी पर स्थित है, अंटार्कटिक वृत्त: यह भूमध्य रेखा से दक्षिण में 66 ½°(66°30’S) की दूरी पर स्थित है, हर वर्ष दो अयनांत होते हैं, जिन्हें ग्रीष्मकालीन अयनांत और शीतकालीन अयनांत कहा जाता है, ग्रीष्मकालीन अयनांत: 21 जून के दिन जब सूर्य कर्क रेखा पर (23 ° 30′ N) ऊर्ध्वाधर होता है, शीतकालीन अयनांत: 22 दिसंबर के दिन जब सूर्य मकर रेखा पर (23°30’S) पर ऊर्ध्वाधर होता है।

देशांतर रेखाएं :- उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर या उत्तर से दक्षिण की ओर चलने वाले अर्ध-वृत्तों को मध्याह्न रेखा या देशांतर कहा जाता है एवं इनके बीच की दूरी को डिग्री में मापा जाता है। 0° देशांतर मान के साथ ग्रीनविच मध्याह्न रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा अपने दोनों ओर पूर्व और पश्चिम में समान संख्या में देशांतर रेखाएं खीचने के लिए आधार प्रदान करता है। प्रधान देशांतर रेखा सहित सहित कुल 360 देशांतर रेखाएं हैं। प्रत्येक डिग्री को साठ बराबर भागों में विभाजित किया जाता है, जिसे मिनट कहा जाता है। प्रत्येक मिनट को फिर से बराबर भागों में विभाजित किया जाता है, सेकेण्ड कहा जाता है।

स्थानीय समय :- किसी भी स्थान का स्थानीय समय दोपहर 12 बजे का होता है जब सूर्य ठीक उर्ध्वाधर होता है। यह ग्रीनविच समय से देशांतर की प्रत्येक डिग्री पर चार मिनट की दर से भिन्न होता है।
ग्रीनविच मीन टाइम :- 0° देशांतर पर के समय को ग्रीनविच मीन टाइम कहा जाता है। यह इंग्लैंण्ड के निकट शून्य देशान्तर पर स्थित ‘ग्रीनविच’ नामक स्थान पर स्थानीय समय पर आधारित है।
भारतीय मानक समय :- यह 82½ ° पूर्व देशांतर पर इलाहाबाद के निकट एक पर के स्थानीय समय के आधार पर तय किया गया है। यह ग्रीनविच मीन टाइम से 5½घंटे आगे है। इसी को भारतीय मानक समय (IST-India Standard Time) कहा जाता है।

ग्लोब :- हमारी पृथ्वी गोलाभ है जो सूर्य की परिक्रमा अपने दीर्घवृत्ताकार पथ पर करती है ग्लोब पृथ्वी का यथार्थ निरूपण है यदि ग्लोब पर धरातल की आकृतियों एवं दिशाओं का प्रदर्शन शुद्धता पूर्वक किया जा सकता है तथापि ग्लोब के प्रयोग में कई असुविधाए आती है मानचित्र पर सभी स्थान अक्षांश एवं देशांतर रेखा (जो काल्पनिक रेखा है) की सहायता से दर्शाए जाते है

अक्षांश रेखा :- किसी स्थान की भूमध्य रेखा से उत्तर तथा दक्षिण की ओर गुणात्मक दूरी को उस स्थान का अक्षांश कहते हैं एक ही कोणात्मक दूरी वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को अक्षांश रेखा कहते हैं भूमध्य रेखा से ध्रुवो तक 90 डिग्री अक्षांश होते हैं |
भूमध्य रेखा से हम जैसे जैसे ध्रुवों की ओर जाएंगे अक्षांश रेखा का मान बढ़ता जाएगा यदि हम भूमध्य रेखा से उत्तर की ओर जाएंगे तो उस स्थान का अक्षांशीय मान लिखेंगे सभी अक्षांश देखा समांतर होती है ,दो अक्षांशो के मध्य की दूरी 111 किमी होती है विषुवत रेखीय वृत्त सबसे बड़ी अक्षांश(40069किमी) है ,उत्तरी गोलार्द्ध मैं विषुवत रेखा से साढ़े 23 डिग्री अंश पर खींचा गया काल्पनिक वृत्त कर्क रेखा है दक्षिणी गोलार्द्ध में विषुवत रेखा से साढ़े 23 डिग्री अंश पर खींचा गया काल्पनिक वृत्त मकर रेखा है साढ़े 66 अंश अक्षांश रेखा को आकृटिक वृत्त कहते हैं |
भारत में माध्य प्रमाणिक समय साढ़े 82 डिग्री पूर्व (इलाहबाद के नैनी) से होकर गुजरता है जो ग्रीनविच मध्याहन से 5 घंटे 30 मिनट आगे है |
क्रोनोमीटर यंत्र की सहायता से ग्रीनविच समय के साथ-साथ किसी भी स्थान का देशांतर ज्ञात किया जाता है भूमध्य रेखा पर देशांतर रेखा के मध्य की दूरी = 111.32 किलोमीटर होती है |

देशांतर रेखा :- उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुवों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखाओं को देशांतर रेखा कहते हैं यह रेखाएं सामांतर नहीं होती है ध्रुवों से विषुवत रेखा की ओर आगे बढ़ने पर देशांतरों के बीच की दूरी बढ़ती जाती है तथा विषवत रेखा पर इनके बीच की दूरी अधिकतम 111.32 किलोमीटर होती है बिट्रेन के ग्रीनविच से गुजरने वाली रेखा को प्रधान मध्याह्न रेखा के दोनों ओर 180 डिग्री अंशों में देशांतर रेखा विभाजित है चूंकि 1 डिग्री देशांतर रेखा को पार करने में 4 मिनट का समय लगता है अतः प्रधान मध्याहन रेखा से 90 डिग्री पर जाने में 6 घंटे का समय लगता है, समय की सुविधा एवं देश में एकरूपता बनाए रखने के लिए अधिकांश देशों में एक ही माध्य प्रमाणिक समय निर्धारित किया गया है जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में 7 एवं सर्वाधिक 9 टाइम जोन रूस में है वहीं ऑस्ट्रेलिया में तीन टाइम जोन है भारत एवं चीन में एक टाइम जोन निर्धारित है , अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा 1884 में वॉशिंगटन में हुई संधि के बाद 180 डिग्री याम्योत्तर के लगभग एक काल्पनिक रेखा निर्धारित की गई है जिसे अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहा जाता है इस रेखा के पूर्व से पश्चिम की ओर यात्रा या पार करने पर 1 दिन घट जाएगा जबकि पश्चिम से पूर्व की ओर यात्रा करने पर एक दिन बढ़ जाएगा |

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा में परिवर्तन :- समूह दीप समूह से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा में दूसरी बार परिवर्तन हुआ है सन 1892 से पहले समोआ द्वीप समूह अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा के पश्चिम में था फिर सन 1892 में समोआ द्वीप समूह को तिथि रेखा के पूर्व में कर दिया था किंतु 30 दिसंबर 2011 को समोआ द्वीप समूह में समोआ द्वीप अब अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पश्चिम में आ गया है जबकि अमेरिकन समोआ अभी भी तिथि रेखा के पूर्व में है टोकेलाऊ द्वीप भी अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के दक्षिण में आ गया है, समोआ द्वीप और टोकेलाऊ में इस परिवर्तन के कारण ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के समीप था तथा इनके साथ व्यापार की अधिकता बताया जाता है विषुवत रेखा के ध्रुवों की ओर जाने पर भार में बढ़ोतरी होती है, जो घूर्णन बलो में कमी के कारण होता है |

Rajasthan Art And Culture Notes

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