भारत के राष्ट्रपति

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भारत के राष्ट्रपति

भारत का संक्षिप परिचय :-
भारत विश्‍व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत है। इसके साथ ही यह अपने-आप को बदलते समय के साथ ढ़ालती भी आई है। आज़ादी पाने के बाद भारत ने बहुआयामी सामाजिक और आर्थिक प्रगति की है। भारत कृषि में आत्‍मनिर्भर बन चुका है और अब दुनिया के सबसे औद्योगीकृत देशों की श्रेणी में भी इसकी गिनती की जाती है। विश्‍व का सातवां बड़ा देश होने के नाते भारत शेष एशिया से अलग दिखता है जिसकी विशेषता पर्वत और समुद्र ने तय की है और ये इसे विशिष्‍ट भौगोलिक पहचान देते हैं। उत्तर में बृहत् पर्वत श्रृंखला हिमालय से घिरा यह कर्क रेखा से आगे संकरा होता जाता है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर तथा दक्षिण में हिन्‍द महासागर इसकी सीमा निर्धारित करते हैं।भारत के राष्ट्रपति क्या |

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भारत के राष्ट्रपति :-
भारत के राष्ट्रपति भारत गणराज्य के कार्यपालक अध्यक्ष होते हैं। संघ के सभी कार्यपालक कार्य उनके नाम से किये जाते हैं। अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालक शक्ति उनमें निहित हैं। वह भारतीय सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च सेनानायक भी हैं। सभी प्रकार के आपातकाल लगाने व हटाने वाला, युद्ध/शांति की घोषणा करने वाला होता है। वह देश के प्रथम नागरिक हैं। भारतीय राष्ट्रपति का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है।भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति के सिद्धांतत :-
राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्ति होती है। पर कुछ अपवादों के अलावा राष्ट्रपति के पद में निहित अधिकांश अधिकार वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद् के द्वारा उपयोग किए जाते हैं।भारत के राष्ट्रपति क्या |
भारत के राष्ट्रपति नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में रहते हैं, जिसे रायसीना हिल के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रपति अधिकतम कितनी भी बार पद पर रह सकते हैं इसकी कोई सीमा तय नहीं है। अब तक केवल पहले राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने ही इस पद पर दो बार अपना कार्यकाल पूरा किया है।भारत के राष्ट्रपति क्या |
प्रतिभा पाटिल भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभित करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2007 को पद व गोपनीयता की शपथ ली थी।वर्तमान में राम नाथ कोविन्द भारत के चौदहवें राष्ट्रपति हैं।भारत के राष्ट्रपति क्या|

भारत के राष्ट्रपति का इतिहास :-
15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ था और अन्तरिम व्यवस्था के तहत देश एक राष्ट्रमंडल अधिराज्य बन गया। इस व्यवस्था के तहत भारत के गवर्नर जनरल को भारत के राष्ट्रप्रमुख के रूप में स्थापित किया गया, जिन्हें ब्रिटिश इंडिया में ब्रिटेन के अन्तरिम राजा जॉर्ज VI द्वारा ब्रिटिश सरकार के बजाय भारत के प्रधानमंत्री की सलाह पर नियुक्त करना था।|भारत के राष्ट्रपति क्या |
यह एक अस्थायी उपाय था, परन्तु भारतीय राजनीतिक प्रणाली में साझा राजा के अस्तित्व को जारी रखना सही मायनों में संप्रभु राष्ट्र के लिए उपयुक्त विचार नहीं था। आजादी से पहले भारत के आखरी ब्रिटिश वाइसराय लॉर्ड माउंटबेटन ही भारत के पहले गवर्नर जनरल बने थे। जल्द ही उन्होंने चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को यह पद सौंप दिया, जो भारत के इकलौते भारतीय मूल के गवर्नर जनरल बने थे। इसी बीच डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान का मसौदा तैयार हो चुका था और 26 जनवरी 1950 को औपचारिक रूप से संविधान को स्वीकार किया गया था। इस तारीख का प्रतीकात्मक महत्व था क्योंकि 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटेन से पहली बार पूर्ण स्वतंत्रता को आवाज़ दी थी। जब संविधान लागू हुआ और डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति का पद संभाला तो उसी समय गवर्नर जनरल और राजा का पद एक निर्वाचित राष्ट्रपति द्वारा प्रतिस्थापित हो गया।
इस कदम से भारत की एक राष्ट्रमंडल अधिराज्य की स्थिति समाप्त हो गया। लेकिन यह गणतंत्र राष्ट्रों के राष्ट्रमंडल का सदस्य बना रहा। क्योंकि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने तर्क किया की यदि कोई भी राष्ट्र ब्रिटिश सम्राट को “राष्ट्रमंडल के प्रधान” के रूप में स्वीकार करे पर ज़रूरी नहीं है कि वह ब्रिटिश सम्राट को अपने राष्ट्रप्रधान की मान्यता दे, उसे राष्ट्रमंडल में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। यह एक अत्यन्त महत्वपूर्ण निर्णय था जिसने बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में नए-स्वतंत्र गणराज्य बने कई अन्य पूर्व ब्रिटिश उपनिवेशों के राष्ट्रमंडल में रहने के लिए एक मिसाल स्थापित किया।भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव :-
भारत के राष्ट्रपति का चुनाव अनुच्छेद 55 के अनुसार आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति के द्वारा होता है।
राष्ट्रपति को भारत के संसद के दोनो सदनों (लोक सभा और राज्य सभा) तथा साथ ही राज्य विधायिकाओं (विधान सभाओं) के निर्वाचित सदस्यों द्वारा पाँच वर्ष की अवधि के लिए चुना जाता है। वोट आवंटित करने के लिए एक फार्मूला इस्तेमाल किया गया है ताकि हर राज्य की जनसंख्या और उस राज्य से विधानसभा के सदस्यों द्वारा वोट डालने की संख्या के बीच एक अनुपात रहे और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों और राष्ट्रीय सांसदों के बीच एक समानुपात बनी रहे। अगर किसी उम्मीदवार को बहुमत प्राप्त नहीं होती है तो एक स्थापित प्रणाली है जिससे हारने वाले उम्मीदवारों को प्रतियोगिता से हटा दिया जाता है और उनको मिले वोट अन्य उम्मीदवारों को तबतक हस्तांतरित होता है, जब तक किसी एक को बहुमत नहीं मिलता।भारत के राष्ट्रपति क्या |

राष्ट्रपति बनने के लिए आवश्यक योग्यताएँ :-
भारत का कोई नागरिक जिसकी उम्र 35 साल या अधिक हो वह पद का उम्मीदवार हो सकता है। राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार को लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता होना चाहिए और सरकार के अधीन कोई लाभ का पद धारण किया हुआ नहीं होना चाहिए। परन्तु निम्नलिखित कुछ कार्यालय-धारकों को राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप में खड़ा होने की अनुमति दी गई है
वर्तमान राष्ट्रपति
वर्तमान उपराष्ट्रपति
किसी भी राज्य के राज्यपाल
संघ या किसी राज्य के मंत्री।
राष्‍ट्रप‍ति के निर्वाचन सम्‍बन्‍धी किसी भी विवाद में निणर्य लेने का अधिकार उच्‍चतम न्‍यायालय को है।

भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग :-
अनुच्छेद 61 राष्ट्रपति के महाभियोग से संबंधित है। भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति मात्र महाभियोजित होता है, अन्य सभी पदाधिकारी पद से हटाये जाते हैं। महाभियोजन एक विधायिका सम्बन्धित कार्यवाही है जबकि पद से हटाना एक कार्यपालिका सम्बन्धित कार्यवाही है। महाभियोजन एक कड़ाई से पालित किया जाने वाला औपचारिक कृत्य है जो संविधान का उल्लघंन करने पर ही होता है। यह उल्लघंन एक राजानैतिक कृत्य है जिसका निर्धारण संसद करती है। वह तभी पद से हटेगा जब उसे संसद में प्रस्तुत किसी ऐसे प्रस्ताव से हटाया जाये जिसे प्रस्तुत करते समय सदन के १/४ सदस्यों का समर्थन मिले। प्रस्ताव पारित करने से पूर्व उसको 14 दिन पहले नोटिस दिया जायेगा। प्रस्ताव सदन की कुल संख्या के 2/3 से अधिक बहुमत से पारित होना चाहिये। फिर दूसरे सदन में जाने पर इस प्रस्ताव की जाँच एक समिति के द्वारा होगी। इस समय राष्ट्रपति अपना पक्ष स्वंय अथवा वकील के माध्यम से रख सकता है। दूसरा सदन भी उसे उसी 2/3 बहुमत से पारित करेगा। दूसरे सदन द्वारा प्रस्ताव पारित करने के दिन से राष्ट्रपति पद से हट जायेगा।भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति की शक्तियाँ :-
न्यायिक शक्तियाँ – संविधान का 72वाँ अनुच्छेद राष्ट्रपति को न्यायिक शक्तियाँ देता है कि वह दंड का उन्मूलन, क्षमा, आहरण, परिहरण, परिवर्तन कर सकता है।भारत के राष्ट्रपति क्या
क्षमादान – किसी व्यक्ति को मिली संपूर्ण सजा तथा दोष सिद्धि और उत्पन्न हुई निर्योज्ञताओं को समाप्त कर देना तथा उसे उस स्थिति में रख देना मानो उसने कोई अपराध किया ही नहीं था। यह लाभ पूर्णत अथवा अंशत मिलता है तथा सजा देने के बाद अथवा उससे पहले भी मिल सकती है।भारत के राष्ट्रपति क्या
लघुकरण – दंड की प्रकृति कठोर से हटा कर नम्र कर देना उदाहरणार्थ सश्रम कारावास को सामान्य कारावास में बदल देना
परिहार – दंड की अवधि घटा देना परंतु उस की प्रकृति नहीं बदली जायेगी
विराम – दंड में कमी ला देना यह विशेष आधार पर मिलती है जैसे गर्भवती महिला की सजा में कमी लाना
प्रविलंबन – दंड प्रदान करने में विलम्ब करना विशेषकर मृत्यु दंड के मामलों में
राष्ट्रपति की क्षमाकारी शक्तियां पूर्णतः उसकी इच्छा पर निर्भर करती हैं। उन्हें एक अधिकार के रूप में मांगा नहीं जा सकता है। ये शक्तियां कार्यपालिका प्रकृति की है तथा राष्ट्रपति इनका प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करेगा। न्यायालय में इनको चुनौती दी जा सकती है। इनका लक्ष्य दंड देने में हुई भूल का निराकरण करना है जो न्यायपालिका ने कर दी हो।
शेरसिंह बनाम पंजाब राज्य 1983 में सुप्रीमकोर्ट ने निर्णय दिया की अनु 72, अनु 161 के अंतर्गत दी गई दया याचिका जितनी शीघ्रता से हो सके उतनी जल्दी निपटा दी जाये। राष्ट्रपति न्यायिक कार्यवाही तथा न्यायिक निर्णय को नहीं बदलेगा वह केवल न्यायिक निर्णय से राहत देगा याचिकाकर्ता को यह भी अधिकार नहीं होगा कि वह सुनवाई के लिये राष्ट्रपति के समक्ष उपस्थित हो

भारत के राष्ट्रपति की वीटो शक्तियाँ :-
विधायिका की किसी कार्यवाही को विधि बनने से रोकने की शक्ति वीटो शक्ति कहलाती है संविधान राष्ट्रपति को तीन प्रकार के वीटो देता है।
पूर्ण वीटो – निर्धारित प्रकिया से पास बिल जब राष्ट्रपति के पास आये (संविधान संशोधन बिल के अतिरिक्त) तो वह् अपनी स्वीकृति या अस्वीकृति की घोषणा कर सकता है किंतु यदि अनु 368 (सविधान संशोधन) के अंतर्गत कोई बिल आये तो वह अपनी अस्वीकृति नहीं दे सकता है। यद्यपि भारत में अब तक राष्ट्रपति ने इस वीटो का प्रयोग बिना मंत्रिपरिषद की सलाह के नहीं किया है माना जाता है कि वह ऐसा कर भी नहीं सकता (ब्रिटेन में यही पंरपंरा है जिसका अनुसरण भारत में किया गया है)।
निलम्बनकारी वीटो – संविधान संशोधन अथवा धन बिल के अतिरिक्त राष्ट्रपति को भेजा गया कोई भी बिल वह संसद को पुर्नविचार हेतु वापिस भेज सकता है किंतु संसद यदि इस बिल को पुन पास कर के भेज दे तो उसके पास सिवाय इसके कोई विकल्प नहीं है कि उस बिल को स्वीकृति दे दे। इस वीटो को वह अपने विवेकाधिकार से प्रयोग लेगा। इस वीटो का प्रयोग अभी तक संसद सदस्यों के वेतन बिल भत्ते तथा पेंशन नियम संशोधन 1991 में किया गया था। यह एक वित्तीय बिल था। राष्ट्रपति रामस्वामी वेंकटरमण ने इस वीटो का प्रयोग इस आधार पर किया कि यह बिल लोकसभा में बिना उनकी अनुमति के लाया गया था।
पॉकेट वीटो – संविधान राष्ट्रपति को स्वीकृति अस्वीकृति देने के लिये कोई समय सीमा नहीं देता है यदि राष्ट्रपति किसी बिल पर कोई निर्णय ना दे (सामान्य बिल, न कि धन या संविधान संशोधन) तो माना जायेगा कि उस ने अपने पॉकेट वीटो का प्रयोग किया है यह भी उसकी विवेकाधिकार शक्ति के अन्दर आता है। पेप्सू बिल 1956 तथा भारतीय डाक बिल 1984 में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने इस वीटो का प्रयोग किया था।
राष्ट्रपति की संसदीय शक्ति – राष्ट्रपति संसद का अंग है। कोई भी बिल बिना उसकी स्वीकृति के पास नहीं हो सकता अथवा सदन में ही नहीं लाया जा सकता है।

भारत के राष्ट्रपति की विवेकाधीन शक्तियाँ :-
* अनु 74 के अनुसार |
* अनु 78 के अनुसार प्रधान मंत्री राष्ट्रपति को समय समय पर मिल कर राज्य के मामलों तथा भावी विधेयकों के बारे में सूचना देगा, इस तरह अनु 78 के अनुसार राष्ट्रपति सूचना प्राप्ति का अधिकार रखता है यह अनु प्रधान मंत्री पर एक संवैधानिक उत्तरदायित्व रखता है यह अधिकार राष्ट्रपति कभी भी प्रयोग ला सकता है इसके माध्यम से वह मंत्री परिषद को विधेयकों निर्णयों के परिणामों की चेतावनी दे सकता है |
* जब कोई राजनैतिक दल लोकसभा में बहुमत नहीं पा सके तब वह अपने विवेकानुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति करेगा |
* निलंबन वीटो/पॉकेट वीटो भी विवेकी शक्ति है |
* संसद के सदनो को बैठक हेतु बुलाना |
* अनु 75 (3) मंत्री परिषद के सम्मिलित उत्तरदायित्व का प्रतिपादन करता है राष्ट्रपति मंत्री परिषद को किसी निर्णय पर जो कि एक मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से लिया था पर सम्मिलित रूप से विचार करने को कह सकता है |
* लोकसभा का विघटन यदि मंत्रीपरिषद को बहुमत प्राप्त नहीं है तो लोकसभा का विघटन उसकी विवेक शक्ति के दायरे में आ जाता है |
किसी कार्यवाहक सरकार के पास लोकसभा का बहुमत नहीं होता इस प्रकार की सरकार मात्र सामन्य निर्णय ही ले सकती है ना कि महत्वपूर्ण निर्णय। यह राष्ट्रपति निर्धारित करेगा कि निर्णय किस प्रकृति का है |

भारत के संविधान के अन्तर्गत राष्ट्रपति की स्थिति :-
रामजस कपूर वाद तथा शेर सिंह वाद में निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसदीय सरकार में वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मंत्रिपरिषद में है। 42, 44 वें संशोधन से पूर्व अनु 74 का पाठ था कि एक मंत्रिपरिषद प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में होगी जो कि राष्ट्रपति को सलाह सहायता देगी। इस अनुच्छेद में यह नहीं कहा गया था कि वह इस सलाह को मानने हेतु बाध्य होगा या नही। केवल अंग्रेजी पंरपरा के अनुसार माना जाता था कि वह बाध्य है। 42 वे संशोधन द्वारा अनु 74 का पाठ बदल दिया गया राष्ट्रपति सलाह के अनुरूप काम करने को बाध्य माना गया। 44वें संशोधन द्वारा अनु 74 में फिर बदलाव किया गया। अब राष्ट्रपति दी गयी सलाह को पुर्नविचार हेतु लौटा सकता है किंतु उसे उस सलाह के अनुरूप काम करना होगा जो उसे दूसरी बार मिली हो।

रिटायरमेंट के बाद राष्ट्रपति को क्या क्या सुविधाएँ मिलती हैं :-
* पेंशन के रूप में 1.5 लाख रुपये प्रति महीना मिलेगा |
* राष्ट्रपति के निधन के बाद उसके पति/पत्नी को पेंशन मिलती है जो कि राष्ट्रपति को मिलने वाली पेंशन से आधी होती है |
* एक सुसज्जित मुक्त बंगला (टाइप VIII के आकार का)
* दो नि: शुल्क लैंडलाइन और एक मोबाइल फोन
* एक निजी सचिव सहित पांच निजी कर्मचारी
* कर्मचारियों पर खर्च करने के लिए प्रति वर्ष 60,000 रुपये का व्यय
* ट्रेन या वायुयान से एक अन्य व्यक्ति के साथ मुफ्त यात्रा सुविधा
* निशुल्क चिकित्सा सुविधा
* मुफ्त दिल्ली पुलिस सुरक्षा
* एक सरकारी कार

भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों को कितनी सैलरी मिलती थी :-
* 1951 में भारत के राष्ट्रपति को 10,000 रुपये का वेतन और 15000 रुपये भत्ता के रूप में मिलते थे |
* 1985 में भारत के राष्ट्रपति को 15,000 रुपये का वेतन और 30000 रुपये भत्ता के रूप में मिलते थे.
* 1989 में भारत के राष्ट्रपति को 20,000 रुपये का वेतन और 10000 रुपये भत्ता के रूप में मिलते थे |
* 1998 में भारत के राष्ट्रपति को 50,000 रुपये का वेतन के रूप में मिलते थे |
* 2008 में भारत के राष्ट्रपति को 1,50,000 रुपये का वेतन मिलता था |
* जनवरी 2016 से भारत के राष्ट्रपति का वेतन 5 लाख रुपये प्रति महीना हो गया है |
भारत सरकार राज्य के राज्यपाल और भारत के उप राष्ट्रपति जैसे अन्य अधिकारियों के वेतन में भी वृद्धि करने की योजना बना रही है इससे पहले 2008 में, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल के वेतन में तीन गुना वृद्धि हुई थी |
इस नवीनतम वृद्धि से पहले, राष्ट्रपति का वेतन 1.5 लाख रुपये प्रति माह था, उपराष्ट्रपति का वेतन प्रति माह 1.25 रुपये था और राज्यपालों का वेतन रु.1,10,000 प्रति माह था. सरकार ने अभी उपराष्ट्रपति के वेतन में वृद्धि की मंजूरी दे दी है; और अब इनका वेतन 3.5 लाख प्रति माह हो जायेगा |
निष्कर्ष में यह कहा जा सकता है कि भारत सरकार राष्ट्रपति से सम्बंधित सभी मदों पर कुल 2 करोड़ रूपये प्रति माह खर्च करती है. इस खर्च में राष्ट्रपति और राष्ट्रपति भवन से सम्बंधित सभी खर्चे शामिल हैं. हालाँकि भारत के राष्ट्र प्रमुख की सैलरी विश्व के अन्य शासकों की तुलना में बहुत कम ही है |

भारत के राष्ट्रपति को वेतन :-
इस समय राष्ट्रपति को 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। उपराष्ट्रपति को 1.25 लाख और राज्यपाल को 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। राष्ट्रपति की सैलेरी में बढ़ोतरी होने के बाद उनका वेतन पांच लाख रुपये प्रतिमाह हो जाएगा। उपराष्ट्रपति को इस प्रस्ताव के पास होने के बाद 3.5 लाख रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।

भारत के राष्ट्रपति की सूची और उनका कार्यकाल :-
डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1884 – 1963) जनवरी 26, 1950 – मई 13, 1962
डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1888-1975) मई 13, 1962 – मई 13, 1967
डॉ. जाकिर हुसैन (1897 – 1969) मई 13, 1967 – मई 03, 1969
वराहगिरि वेंकटगिरि (1884 – 1980)(कार्यवाहक) मई 03, 1969 – जुलाई 20, 1969
न्यायमूर्ति मोहम्मद हिदायतुल्लाह (1905 – 1992)(कार्यवाहक) जुलाई 20, 1969 – अगस्त 24, 1969
वराहगिरि वेंकटगिरि (1884 – 1980) अगस्त 24, 1969 – अगस्त 24, 1974
फखरुद्दीन अली अहमद (1905 – 1977) अगस्त 24, 1974 – फरवरी 11, 1977
बी.डी. जत्ती (1913 – 2002)(कार्यवाहक) फरवरी 11, 1977 – जुलाई 25, 1977
नीलम संजीव रेड्डी (1913 – 1996) जुलाई 25, 1977 – जुलाई 25, 1982
ज्ञानी जैल सिंह (1916 – 1994) जुलाई 25, 1982 – जुलाई 25, 1987
आर. वेंकटरमण (1910 – 2009) जुलाई 25, 1987 – जुलाई 25, 1992
डॉ. शंकर दयाल शर्मा (1918 – 1999) जुलाई 25, 1992 – जुलाई 25, 1997
के. आर. नारायणन (1920 – 2005) जुलाई 25, 1997 – जुलाई 25, 2002
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (1931-2015) जुलाई 25, 2002 – जुलाई 25, 2007
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल (जन्म – 1934) जुलाई 25, 2007 – जुलाई 25, 2012
श्री प्रणब मुखर्जी (जन्म – 1935) जुलाई 25, 2012 – जुलाई 25, 2017
श्री राम नाथ कोविन्द (जन्म – 1945) जुलाई 25, 2017 से अब तक

भारत के राष्ट्रपति की पेंशन :-
पेंशन प्राप्त करने की पात्रता के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 10 वर्ष है। केंद्रीय सरकार का कोई कर्मचारी जो पेंशन नियमावली के अनुसार सेवानिवृत्‍त होता है, वह न्यूनत्तम 10 वर्ष की अर्हक सेवा पूर्ण करने पर अधिवर्षिता पेंशन प्राप्त करने का हकदार है।
कुटुंब पेंशन के मामले में सरकारी कर्मचारी की विधवा अपने पति की एक वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने के बाद या एक वर्ष से पूर्व भी, यदि सरकारी सेवक का उपयुक्त चिकित्सा अधिकारी द्वारा चिकित्सीय परीक्षण करने के बाद, उसे सरकारी सेवा के योग्य घोषित किया गया हो, मृत्यु होने पर पेंशन पाने की हकदार है।
01.01.2006 से पेंशन की गणना, औसत परिलब्धियों, नामत: सेवा के विगत 10 महीनों के दौरान मूल वेतन का औसत या अंतिम मूल वेतन, जो भी अधिक हो, के आधार पर की जाती है। 10/20 वर्ष की अर्हक सेवा के साथ पूर्ण पेंशन औसत परिलब्धियों या अंतिम मूल वेतन, जो भी अधिक हो का 50% है। 01.01.2006 से पूर्व, 33 वर्ष से कम की अर्हक सेवा के अनुपात में होती थी। उदाहरण के लिए, यदि कुल अर्हक सेवा 30 वर्ष और 4 माह है। (अर्थात: 61 अर्धवर्ष) तो पेंशन की गण्ना निम्नवत् की |भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति पेंशन का संराशीकरण :-
केंद्रीय सरकार के कर्मचारी को दिनांक 01.01.1996 से अपने पेंशन के एक भाग के संराशीकरण, जो 40% से अधिक न हो, के एकमुश्त भुगतान का विकल्प उपलब्ध है। यदि सेवानिवृत्ति के एक वर्ष के भीतर इस विकल्प का उपयोग किया जाता है, तो किसी चिकित्सीय परीक्षण की आवश्यकता नहीं है। यदि एक वर्ष के बाद इस विकल्प का प्रयोग किया जाता है, तो उसे विनिर्धारित सक्षम अधिकारी द्वारा चिकित्सीय परीक्षण करवाना होगा।भारत के राष्ट्रपति क्या
देय एकमुश्त राशि की गणना जन्मांकित आधार पर तैयार की गई संराशी सारणी के आधार पर की जाती है। मासिक पेंशन में से संराशीकृत भाग घटा दिया जाएगा और पेंशन के संराशीकृत राशि प्राप्त होने की तिथि से 15 वर्षों के बाद संराशीकृत भाग को पुन: जोड़ दिया जाएगा। हालांकि, मंहगाई राहत की गणना, मूल पेंशन के आधार पर (अर्थात् संराशीकृत भाग को घटाए बिना) की जाती रहेगी।भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति सेवानिवृत्ति उपदान :-
यह सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी कर्मचारी को देय है। एक बार एकमुश्‍त लाभ प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 5 वर्ष की अर्हक सेवा और सेवा उपदान/पेंशन प्राप्त करने की पात्रता अनिवार्य है। पूरी की गई प्रत्येक छह माह की अवधि सेवानिवृत्ति उपदान की गणना सेवानिवृत्ति से पूर्व मूल मासिक वेतन के एक-चौथाई और आहरित मंहगाई भत्तो के योग के आधार पर की जाती है। उपदान धनराशि की कोई न्यूनतम सीमा नहीं है। सेवानिवृत्ति उपदान, परिलब्धियों के 16½ गुना देय है, किंतु अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए है।भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति सेवा उपदान :-
यदि सेवानिवृत्ति होने वाले किसी सरकारी कर्मचारी की कुल अर्हक सेवा 10 वर्ष से कम है, तो वह सेवा उपदान पाने का हकदार होगा (पेंशन नहीं)। यह देय राशि, पूर्ण किए गए प्रत्येक छह माह की अवधि के लिए अंतिम आहरित मूल वेतन के आधे के बराबर होगी। इसके लिए कोई न्यूनतम या अधिकतम धनराशि की सीमा नहीं निर्धारित की गई है। एक बार एकमुश्त दिया जाने वाला यह भुगतान, सेवानिवृत्ति उपदान से अलग है और उसके अतिरिक्त दिया जाता है |भारत के राष्ट्रपति क्या |
भारत के राष्ट्रपति अदेयता (बेबाकी) प्रमाण पत्र जारी किया जाता :-
कार्यालयाध्यक्ष द्वारा, सेवनिवृत्ति से 2 माह पूर्व सेवानिवृत्ति होने वाले कर्मचारी पर सरकारी आवास का लाइसेंस शुल्क, अग्रिम वेतन एवं भत्‍तों के अधिभुगतान के रूप में बकाया का आकलन करना होता है, और लेखा अधिकारी को सूचित करना होता है, ताकि भुगतान किए जाने से पूर्व सेवानिवृत्ति उपदान से इनकी वसूली की जा सके। इस प्रयोजन के लिए सरकारी आवास में रहने वाले कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति के उपरांत नियमानुसार सामान्य किराया पर आवास बनाए रखने की स्वीकृत अवधि तक लाइसेंस शुल्क का आकलन किया जाता है। इस अवधि के उपरांत लाइसेंस शुल्क वसूलने की जिम्मेदारी संपदा निदेशालय की है। यदि किसी कारणवश समय से बकाया का आकलन नहीं किया जा सकता है, तो उपदान की 10% राशि रोक ली जाती है।भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति सामान्य भविष्य निधि और प्रोत्साहन राशि :-
सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवा) नियमावली, 1960 के अनुसार एक वर्ष की निरंतर सेवा के उपरांत सभी अस्थायी सरकारी कर्मचारी पुन: नियुक्त सभी पेंशनभोगी (अंशदायी भविष्य निधि के जिए पात्र पेंशनभोगियों को छोड़कर) और सभी स्थायी सरकारी कर्मचारी इस निधि में अंशदान करने के पात्र हैं। अंशदाता की निधि में अंशदान की शुरुआत करते समय, निर्धारित प्रपत्र में एक नामांकन करना होता है, जिसमें वह एक या अधिक व्यक्तियों को अपनी मृत्यु के उपरांत उस निधि के खाते में जमा देय धनराशि या भुगतान नहीं की गई राशि को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। अंशदाता को अपनी निलंबन की अवधि को छोड़कर भविष्य निधि में मासिक अंशदान करना होता है। अधिवर्षिता की तिथि से 3 माह पूर्व भविष्य निधि में अंशदान बंद कर दिया जाता है । न्यूनतम अंशदान की दर अंशदाता की कुल परिलब्धियों का 6% और अधिकतम कुल परिलब्धियों के बराबर होगी। 01.04.2009 से सामान्य भविष्य निधि में जमा राशि पर ब्याज की दर 8% वार्षिक चक्रवृध्दि है और यह दर सरकारी अधिसूचना के अनुसार बदलती है । किसी विनिर्दिष्ट प्रयोजना के लिए निधि से अग्रिम/निकासी के बारे में नियमावली में उल्लेख किया गया है।भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति जमा आधारित संशोधित बीमा योजना :-
सामान्य भविष्य निधि नियमावली के तहत, अंशदाता की मृत्यु होने पर, अंशदाता के खाते में जमा धनराशि को प्राप्त करने वाले अधिकृत व्यक्ति को अंशदाता की मृत्यु के ठीक पहले 3 वर्षों की अवधि के दौरान औसत शेष धनराशि के बराबर अतिरिक्त राशि का भुगतान किया जाएगा, बशर्ते संबंधित नियमों की विनिर्देष्ट शर्ते पूरी होती हों। उस नियम के तहत दी जाने वाली अतिरिक्त धनराशि 60,000/- रु. से अधिक नहीं होगी। इस लाभ को प्राप्त करने के लिए अंशदाता द्वारा अपनी मृत्यु के समय न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा पूरी कर ली होनी चाहिए।

भारत के राष्ट्रपति अंशदायी भविष्य निधि :-
अंशदायी भविष्य निधि नियमावली (भारत), 1962, राष्ट्रपति के नियंत्रणाधीन किसी भी सेवा के गैर-पेंशनभोगी सरकारी कर्मचारी पर लागू होती है। उस निधि में अंशदान की शुरुआत करते समय अंशदाता को निर्धारित प्रपत्र में नामांकन करना होता है, जिसमें वह अपनी मृत्यु होने पर एक या अधिक व्यक्तियों को अपने खाते में जमा राशि देय होने से पूर्व या जिसका भुगतान नहीं किया गया हो, की प्राप्त करने के लिए अधिकृत करता है।
अंशदाता को डयूटी पर या विदेश सेवा में रहते हुए मासिक अंशदान करना होता है, किंतु निलंबन की अवधि के दौरान नहीं। अंशदान की दर परिलब्धियों की 10% से कम, एवं कुल परिलब्धियों से अधिक नहीं होगी। अंशदाता के नियोक्ता का अंशदान जमा किया जाएगा और यह 10% है। 01.04.2009 से ब्याज की दर 8% वार्षिक चक्रवृध्दि दर से है। इस नियमावली में विनिर्दिष्‍ट प्रयोजनों के लिए अंशदायी भविष्य निधि नियमावली की तरह अंशदायी भविष्य निधि नियमावली में भी जमा आधारित संशोधित बीमा योजना का प्रावधान है।

भारत के राष्ट्रपति किसको शपथ दिलाता हैं :-
उपराष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, एवं प्रधानमंत्री और उसके मंत्री मंडल को भारत के राष्ट्रपति शपथ दिलाते हैं
भारत के राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या फिर उनकी अनुपस्थिति में वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा पद की शपथ दिलाई जाती है राष्ट्रपति द्वारा ली जाने वाली शपथ में निम्नलिखित वाक्य की सहमति से राष्ट्रपति की नियुक्ति दी जाती है
मैं श्रद्धा पूर्वक अपने पद का कार्य पालन करूंगा करूंगी मैं ऐसा विधान और विधि का परीक्षण शिक्षण और प्रशिक्षण करूंगा करूंगी
मैं भारत के जनता की सेवा और कल्याण में निरस्त रहूंगा |भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति के छुट्टी का नकदीकरण :-
केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियमावली के तहत छुट्टी के नकदीकरण का लाभ है, पेंशन संबंधी लाभ नहीं। सेवानिवृत्ति के दिन सेवानिवृत्ति होने वाले सरकारी कर्मचारी के खाते में जमा अर्जित छुट्टी/अर्ध-वेतन छुट्टी का नकदीकरण किया जा सकता है, बशर्ते यह अधिकतम 300 दिनों का है। छुट्टी के नकदीकरण में विलंब के लिए उस नियमावली के तहत किसी ब्याज के भुगतान का प्रावधान नहीं है। भारत के राष्ट्रपति क्या |

भारत के राष्ट्रपति केंद्रीय सरकारी कर्मचारी समूह बीमा योजना :-
सेवा के दौरान मासिक अंशदान के एक भाग को बचत निधि में जमा किया जाता है, जिस पर ब्याज देय है। सेवा ग्रहण करते समय सरकारी कर्मचारी को उपर्युक्त योजना के प्रपत्र 4 में कार्यालयाध्यक्ष को आवेदन करना होता है, जो अंशदाता द्वारा जमा की गई राशि को ब्याज सहित बचत निधि में भुगतान हेतु स्वीकृति पत्र जारी करेगा, और सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद उसके वितरण की व्यवस्था करेगा। इस योजना के तहत किया जाने वाला भुगतान लाभ तालिका के आधार पर किया जाता है, जिसमें सेवा समाप्ति के दिन तक के ब्याज का आकलन किया गया है। इस योजना के तहत अंशदाता की मृत्यु होने पर परिवार को बीमा का लाभ मिलता है। इस योजना के तहत किए जाने वाले भुगतान में विलंब के लिए किसी भी ब्याज का भुगतान देय नहीं है। भारत के राष्ट्रपति क्या |

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