हरित गृह क्या है

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हरित गृह क्या है :- हरित ग्रह के अंदर विकरित ऊष्मा का कांच की छत और दीवारों के कारण कैद हो जाने के कारण हरित ग्रह का गर्म होना। पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड एवं जलवाष्प द्वारा पृथ्वी सतह से विकरित होने वाली सूर्य की गर्मी को कैद कर यह प्रभाव उत्पन्न किया जाता है जो वैश्विक तापन को बढ़ाता है।

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हरित गृह प्रभााव के परिणााम :- यह अनुमान लगाया गया हैं कि अगर कार्बन डाइ ऑक्साइड के स्तर के बढ़ने की वर्तमान दर यही रही तो वायुमंडलीय तापमान 21वी सदी के अंततक 20 से 30 तक बढ़ जायेगा। इसके परिणाम स्वरूप बहुत सी हिमानियां पीछे खिसक जायेगी, ध्रुवीय क्षत्रे में बर्फीली चोटियॉ गायब हो जायंगे और बहुत बड़े पैमाने पर विश्व के अन्य भागों में बर्फ के भंडार गायब होजायेंगे। एक अनुमान के अनुसार यदि पृथ्वी की सारी बर्फ पिघल जाये तोसभी महासागरों की सतह पर और निचले तटीय क्षेत्रों में लगभग 60 मीटरपानी बढ़ जायेगा। भूमंडलीय तापमान द्वारा समुद्री जल स्तर में केवल 50 से 100 सेंटीमीटर की वृद्धि विश्व के निचले क्षेत्रों जैसे बांग्लादेश, पश्चिमबंगाल और सघन बसे हुये तटीय शहरों जैसे शंघा और सेन फ्रांसिस्कोंको जलमग्न कर देगी।
कार्बन डा ऑक्साइड के बढ़े हुये संकेंद्रण और उष्णकटीबंधीय महासागरोंके अधिक गर्म होने के कारण अधिक संख्या में चक्रवात और हरीकेनआयेंगे। पर्वतों पर बर्फ के जल्दी पिघलने से मानसून के समयअधिक बाढ़े आयेंगी। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार बढ़ताहुआ समुद्री जल स्तर लगभग तीन दशकों में तटीय शहरों जैसे मुंब,बोस्टन, चिट्टगाँव और मनीला को जलमग्न कर देगा।
भूमंडलीय तापमान में जरा सी भी वृद्धि खाद्यान्न उत्पादन पर प्रतिकूलअसर डालेगी। अत: उत्तरी गोलार्द्ध में गेहूँ उत्पादन क्षेत्र शीतोष्णकटिबंध के उत्तर में खिसक जायेंगे, समुद्र के ऊपरी जलस्तर के गर्म होने से महासागरों की जैविक उत्पादकताभी कम हो जायेगी। उध्र्वाधर चक्रण द्वारा समुद्र के निचले भागों से समुद्रकी सतह की ओर पोशकों का परिवहन भी कम हो जायेगा।

हरित गृह प्रभाव नियंत्रण एवं उपचार के उपाय :- हरित गृह प्रभाव के लगातार बढ़ते जाने को उपायों द्वारा कम किया जा सकता है, कार्बनडाइऑक्साइड के संकेंद्रण को अत्यंत विकसित और औद्योगिक देशोंजैसे संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और जापान तथा विकासशील देशों जैसे चीनआरै भारत द्वारा जीवाश्म इर्ंधनों के उपयोग में जोरदार कटौती करके कमकिया जा
वैकल्पिक सफल इंधन का विकास करने के लिये वैज्ञानिक उपाय कियेजाने चाहिये। मीथेन, पेट्रोलियम का विकल्प हो सकती हैं। जल विद्युतऊर्जा का विकास एक अच्छा विकल्प हैं।
कारखानों और मोटर गाड़ियों से खतरनाक गैसों के उत्सर्जन पर रोकलगनी चाहिये।
महानगरों में मोटर गाड़ियों को चलाने के दिनों को सीमित करना भी एकअन्य विकल्प हो सकता हैं। सिंगापरु और मैक्सिकों शहर इस पथ् कोअपना रहे हैं, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबध्ंय देशों मे जीवाष्म इर्ंधनों के विकल्प केरूप में सौर ऊर्जा का विकास किया जा सकता हैं, बायोगैस संयंत्र लगाने चाहिये जो कि घरेलू उपयोग के लिये एक पारंपरिकऊर्जा का साधन हैं, वनरोपण में वृद्धि करके कार्बन डाइऑक्साइड स्तर को निश्चित रूप सेकम किया जा सकता हैं। जिससे अंतत: हरित गृह प्रभाव कम हो जायेगा।

हरित गृह से अम्लीय वर्षा :- अम्लीय वर्षा’ शब्द का अर्थ हैं वायुमंडल से तर या सूखे अम्लीय पदार्थोका पृथ्वी के धरातल पर निक्षेप। हांलाकि यह साफतौर पर वर्षा से संबंधित हैं,परंतु प्रदूषण-कण पृथ्वी के धरातल पर या तो हिम, सहिम वृष्टि और ओलों केरूप में गिर सकते हैं अथवा कोहरा या गैसों के सूखे रूप में पृथ्वी के धरातल परपहुँचते हैं। अम्लीय वर्षा के लिये उत्तरदायी मुख्य कारक सलफ्यूि रक अम्ल आरैनाइट्रिक अम्ल को माना जाता हैं। परंतु इसके लिये मुख्य रूप से मनुष्य दोषी हैं कारखानों द्वारा उत्सर्जित धुंआ सल्फर डाइ-ऑक्साइड का मुख्य स्त्रोत हैं। जबकिये मोटर गॉंडियों से निकला धुॅंआ नाइट्रोजन आक्साइड का मुख्य स्त्रोत हैं येउत्सर्जित गैंसे वायुमंडलीय आद्रर्ता के साथ मिलकर सलफ्यूरिक अम्ल औरनाइट्रिक अम्ल बनाती हैं जो देर सवेर विभिन्न रूपों में पृथ्वी के धरातल पर गिरजाता हैं।
अम्लता को एक चभ् मापक पर मापा जाता है जो हाइड्रोजन आयनों केसापेि क्षक संकेंद्रण पर आधारित हैं। यह मापक 0 स 14 क्रम में बटं होता है।इसका निचला भाग अत्यधिक अम्लता को दर्शाता हैं और ऊपर का भागअत्यधिक क्षारीयता को दर्शाता हैं। जैसा कि पहले से बतायागया हैं अम्लीय वर्षा, वर्षण के बहुत से प्रकारों से संबंधित होती हैं। यदि हम स्वच्छ, और धूल रहित वायु में वर्षा को देखें तो इसका मान 5.6 से 6-0pH के बीच होगाजो थोड़ा सा अम्लीय होगा। जब कभी भी और जहां कहीं भी चभ् मान 5.6 सेनीचे होगा तो इससे होने वाले नुकसान देखने लायक होगा, अम्लीय वर्षण के मानवीय स्वास्थ्य और कृषि उत्पादन पर पड़ने वालेदूरगामी प्रभावों का अभी अच्छी तरह से आकलन नहीं किया गया हैं परंतु इससेसबसे अधिक सुस्पष्ट नुकसान जलीय पारितंत्र को हो रहा हैं। एक नदी या झीलका पारितंत्र इससे सबसे अधिक प्रभावित होता है। जब इसका चभ् मान 5 से नीचेचला जाए ऐसे तंत्रों में कुल जीवसमूह दो से दस गुणा कम हो जाता हैं, क्योंकिबहुत कम जीव अम्ल को सहन कर सकते हैं। जैव विविधता भी कम हो जाती हैं।अम्लीयता का सबसे अधिक असर मछलियों पर होता हैं। अम्लीय परिस्थितियाँमछलियों की प्रजनन क्षमता को कम करती हैं जिसके परिणामस्वरूप मछलियों कीसख्ं या धीरे-धीरे कम हो जाती है। यह यूरोप और उत्तरी अमेरीका के बहुत सेहिस्सों में प्रमाणित हो चुका हैं। नार्वे के 33,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में हजारोंझीलों और सरिताओं में मछलियां समाप्त हो ग हैं। पिछली चौथा शताब्दी मेंपूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की सैंकड़ों झीलें जैविक मरूस्थल बन गहैं। अम्लीय वर्षा का वनों पर सही सही प्रभाव अभी तक अच्छी तरह नहीं समझाजा सका हैं परंतु कुछ प्रमाण यह दर्शाते हैं कि ये वनों के मुरझाने का प्रमुख कारणहैं। यह प्रत्येक महाद्वीप मे हो रहा हैं ‘‘वनों का मुरझाना’’ एक जर्मन शब्द हैंजिसका अर्थ हैं वनों का मृत हो जाना। या कम हो जाना यहां तक कि भवन औरस्मारक भी नष्ट हो रहें हैं, क्योंकि अम्ल का इन पर जमाव अपरदन क्रिया को बढ़ादेता हैं।
अम्लीय वर्षा एक खतरनाक वैश्विक समस्या हैं और इसका असर प्रदूषणपैदा होने के स्थान से बहुत दूर तक फलै सकता हैं। इसीलिये स्केंडिनेविया केदेशों ने यूरोप में ब्रिटिश प्रदूषण के खिलाफ आपत्ति की हैं और कनाडा ने उत्तरअमेरिका में संयुक्त राज्य अमेरिका को दोषी माना हैं।

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