गंगा शरण पुरस्कार

गंगा शरण पुरस्कार

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गंगाशरण सिंह पुरस्कार क्या है :-
गंगाशरण सिंह पुरस्कार’ केंद्रीय हिंदी संस्थान, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा दिया जाने वाला एक प्रमुख साहित्य सम्मान है। यह पुरस्कार राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार और हिन्दी प्रशिक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करने वाले किसी भारतीय विद्वान को प्रदान किया जाता है

गंगाशरण सिंह जीवनी :-
गंगा बाबू का जन्म पटना जिले के खड़गपुर में हुआ था। 1928 में उन्होने पटना से मासिक ‘युवक’ का प्रकाशन आरम्भ किया। आचार्य नरेन्द्र देव के विचारों से प्रेरित और प्रभावित इस पत्र के लिये उन्होने अपने जीवन की सारी संचित पूँजी लगा दी थी। उसके जब्त हो जाने पर वे साप्ताहिक ‘जनता’ निकालने लगे। हिन्दी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, गुजराती और अंग्रेजी के मर्मज्ञ विद्वान गंगा बाबू ने स्वतंत्रता आन्दोलन में अनेक बार जेल की यातना सही। वे सही अर्थों में एक लोकनेता थे। दबंग और प्रखर गंगाबाबू की स्पष्तवादिता से कैइ लोग काँपते थे।

गंगाशरण सिंह हिन्दीसेवा :-
हिंदी सेवी सम्‍मान योजना का आरम्भ 1989 में आगरा स्थित केंद्रीय हिंदी संस्‍थान द्वारा की गई थी। प्रतिवर्ष हिंदी भाषा और साहित्‍य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सात विभिन्‍न श्रेणियों में 14 विद्वानों को ये सम्‍मान दिया जाता है। सम्‍मानस्‍वरूप एक लाख रुपया और प्रमाणपत्र भेंट किया जाता है। पुरस्कृत विद्वानों को संस्थान की ओर से भारत के राष्ट्रपति द्वारा एक लाख रुपए, शॉल तथा प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाता है। सन् 1989 से 2011 तक इस योजना के अंतर्गत कुल 332 विद्वानों को सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के पद पर संस्थापित करने के लिये अथक प्रयास किया। वे भारतीय ज्ञानपीठ के संस्थापक न्यासी-बोर्ड के सदस्य थे। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा ने उनके नाम पर “गंगाशरण सिंह सम्मान” की स्थापना की है। बिहार सरकार भी उनके नाम पर एक साहित्य पुरस्कार प्रदान करती है |

गंगाशरण सिंह हिन्दी साहित्यकार :-
गंगाशरण सिंह (1005-1988) भारत के स्वतंत्रता-संग्राम-सेनानी, राज्यसभा-सदस्य एवं हिन्दी साहित्यकार थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में थे तथा कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी के संस्थापकों में से थे। वे बिहार से तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे (1956–62, 1962-68 तथा 1968-1974 तक नामित सदस्य)। वे बाबू राजेन्द्र प्रसाद के निकट सहयोगी थे। पटना में जयप्रकाश नारायण और गंगा बाबू एक ही घर में साथ-साथ रहते थे।

गंगाशरण सिंह पुरस्कार में किया दिया जाता है :-
इस पुरस्कार की स्थापना 1989 में केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा की गई थी। यह पुरस्कार एक साहित्यिक एवं हिंदी सेवी सम्मान भी है, जो देश के स्वतंत्रता सेनानी गंगाशरण सिंह की स्मृति में दिया जाता है, जो देशप्रेमी होने के साथ-साथ एक महान हिन्दी सेवक भी थे। गंगाशरण सिंह पुरस्कार पहले साल सोलह विद्वानों को दिया गया था। इसके बाद यह प्रतिवर्ष चार लोगों को प्रदान किया जाता है। पुरस्कार में एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र तथा शाल दिये जाते हैं। गंगाशरण सिंह पुरस्कार प्रदान करने वाला केंद्रीय हिंदी संस्थान, भारत का प्रमुख हिंदी सेवी संस्थान है, जो हिन्दी भाषा को विस्तार देने में कार्यरत है।

गंगाशरण सिंह समिति :-
भारत सरकार ने सन् 1969 में शिशु शिक्षा पर गंगाशरण सिंह समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।

गंगाशरण सिंह पुरस्कार से पुरस्कृत विद्वानों की लिस्ट :-
गंगाशरण सिंह पुरस्कार
क्रम सम्मानित विद्वान
श्री मोटूरि सत्यनारायण
श्री दत्तात्रेय मिश्र
श्री गो. पे. नेने
श्री नरसिंह नंद शर्मा
श्री गिरिराज किशोर शाह
श्री एच. गोकुलानंद शर्मा
श्री शंकरराव लोढ़े
श्री नरेंद्र अंजरिया
श्रीमती मुतुबाई माने
श्री जेठालाल जोशी
श्री रजनीकांत चक्रवर्ती
श्री आंजनेय शर्मा
श्री एम. के. वेलायुधन नायर
श्री र. शौरिराजन
श्री एस. शारंगपाणि
श्री लोकनाथ भराली
प्रो. रामलाल पारीख
डॉ. ब्रजबिहारी कुमार
सुश्री बी. एस. शांताबाई
श्री एस. चंद्रमौलि
श्री मधुकर राव चौधरी
श्री नवीनचद्रं कलिता
श्री केशवन नायर
श्री सी. वी. जोसेफ
श्री प्र. द. पुराणिक
डॉ. तोम्बी सिंह
श्री एम. सुब्रह्मण्यम
श्री वे. राधाकृष्णमूर्ति
श्रीमती एम. तंकम्मा मलिक
पं. रामकृष्ण नावड़ा.
श्री हेमाम लीलमणि सिंह
श्री कर्तारसिंह दुग्गल
श्रीमती सरस्वती रामनाथ
श्री कांतिलाल जोशी
डॉ. भीमसेन ‘निर्मल’
डॉ. तारिणी चरण दास
श्री एस. वि. शिवराम शर्मा
प्राचार्य सुमतिलाल मोतीलाल शा
पं. नारायण देव जी
पं. राधामोहन शर्मा
श्रीमती राजलक्ष्मी राघवन
श्री मि. सुब्बाराव
डॉ एम.एस. कृष्णमूर्ति इन्द्रेश
श्री बापचंद्र महंत
श्री डी. तंगवेलन
श्री माधव वामन पंडित
श्री के. हिमाचार्य शर्मा
श्री एम. जनार्दनन पिल्लै
श्री डॉ. पी. आर. श्रीनिवास शास्त्री
डॉ. शंकर लाल पुरोहित
डॉ.पी. आदेश्वर राव
डॉ. मोरेश्वर दिनकर पराडकर
प्रो. एस. श्रीकंठमूर्ति
प्रो. धर्मपाल सिंहल
डॉ. एस. (सुब्रह्मण्यम) वृष्णपीया
प्रो. दारछोना
डॉ. पी. नारायण
श्री एस. नीलवीर शर्मा शास्त्री
श्री बोयपाटि नागेश्वर राव
डॉ. पीतांबर चिमणराव
डॉ. एम.के. भारतीरमणाचार्य
श्री बी. चिनैयन
स्व. श्री अरिबम घनश्याम शर्मा
डॉ मुरलीधर बसीलाल शहा
श्री कांज वेंकटेश्वर राव
श्री मुरलीधर मारुति जगताप
श्री रामन नायर
श्री रमेंद्र कुमार पाल
प्रो.आर. जनार्दनन पिल्लै
डॉ. पोलि विजयराघव रेड्डी
डॉ. बी. रामसंजीवय्या
डॉ. ए. अहमद हुसैन
श्री एम. पियोंगतेमजन जामीर
डॉ. सत्यपाल श्रीवत्स
प्रो. इबोहल सिंह काङ्जम
श्री मानिक बच्छावत
श्री. मोहनदास सोनू सुर्लकर
डॉ. आर. वेंकटकृष्णन
स्व. श्री एच. पहलीरा
श्री के.एम.सामुअल
श्री नवनीत आर. ठक्कर
श्री फु.गोकुलानंद शर्मा
श्री सुतीक्ष्ण कुमार शर्मा
प्रो.एम.इकबाल
श्री शशिकांत रघुनाथ जोशी
डॉ. टी.वी.कट्टीमनी
प्रो. विलास सोनू सुर्लकर
प्रो. इंद्रनाथ चौधुरी
डॉ. एम. शेषन
प्रो. ज़ोहरा अफ़ज़ल
प्रो. ए. अरविंदाक्षन
श्री गिरीश कर्नाड
श्री श्याम बेनेगल
प्रो. माधुरी छेड़ा
श्री बल्ली सिंह चीमा
प्रो. वाई. लक्ष्मी प्रसाद
डॉ. दामोदर खडसे
श्री मधुर भंडारकर
प्रो. चमनलाल सप्रू
वर्ष श्री आर. एफ़. नीरलकट्‍टी
श्री जान्हू बरुआ |

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