भारत में राज्य पुनर्गठन अधिनियम
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भारत में राज्य पुनर्गठन अधिनियम

राज्य पुनर्गठन अधिनियम ( जुलाई, 1956) :-
राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट के प्रकाश में आते ही भारत के कई क्षेत्रों में असंतोष फूट पङा।बंबई में तो व्यापक पैमाने पर उपद्रव हुए। महाराष्ट्र के लोग भाषा के आधार पर पृथक् महाराष्ट्र राज्य की माँग करने लगे तो गुजरात के लोग सौराष्ट्र और गुजरात को मिलाकर पृथक् महाराष्ट्र राज्य की माँग करने लगे। तत्कालीन केन्द्रीय वित्तमंत्री देशमुख जब पृथक महाराष्ट्र की स्थापना के लिए नेहरू को नहीं मना पाये तो उन्होंने इस प्रश्न पर मंत्री-पद से ही त्यागपत्र दे दिया।
संसद के दोनों सदनों में भी इस विषय पर जोरदार बहस होती रही।अंत में जुलाई, 1956 ई. में संसद ने एक राज्य-पुनर्गठन अधिनियम पारित कर दिया। इस अधिनियम में आयोग की रिपोर्ट में कुछ परिविर्तन किये गये |
अधिनियम के अनुसार पंजाब और पेप्सू को मिलाकर एक राज्य बना दिया गया। परंतु हिमाचल प्रदेश को केन्द्रीय क्षेत्र बना दिया गया। बंबई राज्य का आकार बढा दिया गया। विदर्भ राज्य और हैदराबाद राज्य के मराठवाङा क्षेत्र को बंबई राज्य में मिला दिया गया।
हैदराबाद राज्य के कुछ हिस्से को मैसूर राज्य में मिला दिया गया। बदले में तैलंगाना क्षेत्र को आंध्र प्रदेश में सम्मिलित कर दिया गया। आयोग की अनुशंसा के अनुसार मध्यप्रदेश और केरल दो राज्य बना दिये गये।
भोपाल राज्य को मध्यप्रदेश में मिला दिया गया। इसी प्रकार केन्द्र शासित अजमेर क्षेत्र को राजस्थान में मिला दिया गया।इस अधिनियम की एक विशेषता राजप्रमुखों के पद की समाप्ति थी। अब सभी राज्यों के लिये राज्यपाल पद की व्यवस्था की गई। भारत में राज्य पुनर्गठन अधिनियम ,

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भारत में राज्य पुनर्गठन आयोग :-
भारत के स्वतंत्र होने के बाद भारत सरकार ने अंग्रेजी राज के दिनों के ‘राज्यों’ को भाषायी आधार पर पुनर्गठित करने के लिये राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganisation Commission) की स्थापना की। 1950 के दशक में बने पहले राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश में राज्यों के बंटवारे का आधार भाषाई था। इसके पीछे तर्क दिया गया कि स्वतंत्रता आंदोलन में यह बात उठी थी कि जनतंत्र में प्रशासन को आम लोगों की भाषा में काम करना चाहिए, ताकि प्रशासन लोगों के नजदीक आ सके।

भारत में राज्य पुनर्गठन आयोग का इतिहास :-
अंग्रेजों से पहले का भारत 21 प्रशासनिक इकाइयों (सूबों) में बँटा हुआ था। इनमें से कई सूबों की सांस्कृतिक पहचान सुस्पष्ट थी और कुछ में संस्कृतियों का मिश्रण था। किन्तु भारत को अपना उपनिवेश बनाने के बाद अंग्रेजों ने प्रशासनिक सुविधा का खयाल करते हुए मनमाने तरीके से भारत को नये सिरे से बड़े-बड़े प्रांतों में बाँटा। एक भाषा बोलने वालों की भू-क्षेत्रीय समरसता पूरी तरह भंग कर दी गयी। बहुभाषी व बहुजातीय प्रांत बनाये गये। इतिहासकारों की मान्यता है कि भले ही इन प्रांतों को ‘फूट डालो और राज करो’ के हथकंडे का इस्तेमाल करके नहीं बनाया गया था, पर उनमें अपनी सत्ता टिकाये रखने के लिए अंग्रेजों ने इस नीति का जम कर उपयोग किया।
1920 के दशक में जैसे ही गाँधी के हाथ में कांग्रेस का नेतृत्व आया, आजादी के आंदोलन की अगुआयी करने वाले लोगों को लगा कि जातीय-भाषाई अस्मिताओं पर जोर दे कर वे उपनिवेशवाद विरोधी मुहिम को एक लोकप्रिय जनाधार दे सकते हैं। अत कांग्रेस ने अंग्रेजों द्वारा रचे गये ‘औपनिवेशिक प्रांत’ की जगह ख़ुद को ‘प्रदेश’ नामक प्रशासनिक इकाई के इर्द-गिर्द संगठित किया। यह ‘प्रदेश’ नामक इकाई अपने बुनियादी चरित्र में अधिक लोकतांत्रिक, सांस्कृतिक (जातीय और भाषाई) अस्मिता के प्रति अधिक संवेदनशील और क्षेत्रीय अभिजनों की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाओं के प्रति जागरूक थी। इस तरह ‘नये भारत’ की कल्पनाशीलता को उसका आधार मिला। कांग्रेस के इस पुनर्गठन के बाद राष्ट्रीय आंदोलन भाषाई अस्मिताओं से सुनियोजित पोषण प्राप्त करने लगा। प्रथम असहयोग आंदोलन की जबरदस्त सफलता के पीछे मुख्य कारण यही था।

राज्यों के पुनर्गठन से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारी और तथ्‍य :-
भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन उचित है या नहीं, इसकी जांच के लिए संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश एस. के. धर की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय आयोग की नियुक्ति की
1. भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन उचित है या नहीं, इसकी जांच के लिए संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश एस. के. धर की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय आयोग की नियुक्ति की. इस आयोग ने भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन का विरोध किया और प्रशासनिक सुविधा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का समर्थन किया |
2. धर आयोग के निर्णयों की परीक्षा करने की लिए कांग्रेस कार्य समिति ने अपने जयपुर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू, बल्लभ भाई पटेल और पट्टाभि सीतारमैय्या की एक समिति का गठन किया. इस समिति ने भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग को खारिज कर दिया |
3. नेहरू पटेल एवं सीतारमैय्या (जे. वी. पी. समिति) समिति की रिपोर्ट के बाद मद्रास राज्य के तेलगु-भाषियों नें पोटी श्री रामुल्लू के नेतृत्व में आंदोलन प्रारम्भ हुआ |
4. 56 दिन के आमरण अनशन के बाद 15 दिसंबर, 1952 ई० को रामुल्लू की मृत्यु हो गई |
5. रामुल्लू की मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री नेहरू ने तेलगुभाषियों के लिए पृथक आंध्र प्रदेश के गठन की घोषणा कर दी |
6. 1 अक्टूबर, 1953 ई० को आंध्र प्रदेश राज्य का गठन हो गया. यह राज्य स्वतन्त्र भारत में भाषा के आधार पर गठित होने वाला पहला राज्य था |
7. राज्य पुनर्गठन अयोग के अध्यक्ष फजल अली थे; इसके अन्य सदस्य प० हृदयनाथ कुंजरू और सरदार के एम. पणिक्कर थे |
8. राज्य पुनर्गठन अधिनियम जुलाई 1956 ई० में पास किया गया. इसके अनुसार भारत में राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश स्थापित किए गए |
9. नवंबर, 1954 ई० को फ्रांस की सरकार ने अपनी सभी बस्तियां पांडिचेरी, यनाम, चंद्रनगर और केरिकल को भारत को सौंप दिया; 28 मई 1956 ई० को इस संबंध में संधि पर हस्ताक्षर हो गए. इसके बाद इन सभी को मिला कर ‘पांडिचेरी संघ राज्य क्षेत्र’ का गठन किया गया |
10. भारत सरकार ने 18 दिसंबर, 1961 ई० को गोवा, दमन द्वीप की मुक्ति के लिए पुर्तगालियों के विरुद्ध कार्रवाई की और उन पर पूर्ण अधिकार कर लिया. बारहवें संविधान संशोधन द्वारा गोवा, दमन और द्वीप को प्रथम परिशिष्ट में शामिल करके अभिन्न अंग बना दिया गया |
11. 1 मई, 1960 ई० को मराठी एवं गुजराती भाषियों के बीच संघर्ष के कारण बम्बई राज्य का बंटवारा करके महाराष्ट्र एवं गुजरात नामक दो राज्यों की स्थापना की गई |
12. नागा आंदोलन के कारण असम को विभाजित करके 1 दिसंबर, 1063 ई० में नागालैंड को अलग राज्य बनाया गया |
13. 1 नवंबर,1966 ई० में पंजाब को विभाजित करके (पंजाबी भाषा) एवं हरियाणा (हिंदी भाषी) दो राज्य बना दिए गए |
14. 25 जनवरी, 1971 ई० को हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया |
15. 21 जनवरी, 1972 ई० मणिपुर, त्रिपुरा एवं मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया |
16. 26 अप्रैल,1975 ई० सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना |
17. 20 फरवरी, 1987 ई० में मिजोरम एवं अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया|
18. 30 मई, 1987 ई० में गोवा को 25वां राज्य का दर्जा दिया गया |
19. 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ 26वां राज्य, 9 नवंबर 2000 में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) 27वां राज्य, 15 नवंबर 2000 को झारखंड 28वां राज्य और 02 जून 2014 को तेलंगाना को भारत का 29वां राज्‍य बनाया गया |
20. वर्तमान समय में भारत में 29 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं |
21. क्षेत्रीय परिषद: भारत में पांच क्षेत्रीय परिषद हैं. इनका गठन राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है और केंद्रीय गृहमंत्री या राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत केंद्रीय मंत्री क्षेत्रीय परिषद का अध्यक्ष होता है. संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री उपाध्यक्ष होते हैं, जो प्रतिवर्ष बदलते रहते हैं |

भारत की मौजूदा संघीय प्रणाली :-
भारत की मौजूदा संघीय प्रणाली में राज्यों को संघ के सदस्यों के रूप में अपनाया गया है, तथा सभी राज्य शक्ति विभाजन में संघ के हिस्सेदार हैं, संघीय क्षेत्र से तात्पर्य उन क्षेत्रों से हैं जिन पर भारत की संप्रभुता का विस्तार है |
अनुच्छेद 1 के अनुसार भारत राज्यों का संघ होगा,भारतीय संविधान निर्माताओं ने फेडरल के स्थान पर यूनियन शब्द का प्रयोग किया ! इसका अभिप्राय है, कि राज्यों को भारत से अलग होने का अधिकार नहीं है |
अनुच्छेद 2 के अनुसार संसद विधि द्वारा निबंधनों और शर्तों पर,जो राज्य का प्रवेश किया उसकी स्थापना कर सकेगी |
अनुच्छेद 3 के तहत संसद को नए राज्य की स्थापना एवं वर्तमान राज्य के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति है |

भारत में राज्य पुनर्गठन आयोग :-
संविधान द्वारा राज्यों की श्रेणी में बटवारा तत्कालीन उपयोगिता के आधार पर किया गया था ! प्रायः सभी इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है ! इससे देश के विभिन्न भागो ,विशेष रूप से दक्षिण से मांग उठाने लगी की राज्यों का पुनर्गठन भाषा के आधार पर किया जाये ! जिसके कारण

भारत में धर आयोग :-
जून 1948 में भाषीय आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के लिए धर आयोग गठित किया गया इस आयोग ने दिसंबर,1948 में कहा कि नए राज्यों का निर्माण का आधार भाषा नहीं बल्कि प्रशाशनिक कार्यकुशलता होनी चाहिए |

भारत में जेवीपी समिति:-
दिसंबर 1948 में कांग्रेस के तीन नेताओं जवाहरलाल नेहरू,बल्लभ भाई पटेल और पट्टाभि सितमरैया को मिलाकर एक समिति बनाई गई ! समिति ने अपनी रिपोर्ट अप्रैल 1949 में प्रस्तुत किया, इस समिति ने नए राज्य के गठन का आधार प्रशासनिक कार्यकुशलता को बताया |

भारत में फजल अली आयोग :-
वर्ष 1953 में भारत सरकार ने भाषा के आधार पर आंध्र प्रदेश का गठन सबसे पहले किया,जिसके फलस्वरूप एक आंदोलन शुरू हुआ था ! सरकार ने दिसंबर 1953 को फजल अली की अध्यक्षता में नए राज्य के गठन के बारे में एक आयोग का गठन किया इस आयोग के अन्य सदस्य थे, हृदयनाथ कुंजरू और के एम् पणिक्कर ! इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट वर्ष 1955 में प्रस्तुत की इस आयोग ने ‘एक भाषा एक राज्य’ के सिद्धांत को नकार दिया और नए

राज्य के गठन के निम्न आधार बताएं :-
– राष्ट्रीय एकता और अखंडता
– सांस्कृतिक व भाषायी तत्व
– प्रशासनिक कार्य कुशलता
– जनकल्याण

भारत के राज्‍य और उनके गठन और पुनर्गठन :-
भारत की आजादी पहले अंग्रेजी हुकुमत ने भारत को अपने हिसाब से बॉट रखा था, जिसमेें 562 देशी रियासतों शामिल थी, 1947 में भारत को आजादी मिलते ही इन 562 देशी रियासतों के एकीकरण व पुनर्गठन किया जाना था, अंग्रेजी राज के दिनों के ‘राज्यों’ को भाषा के आधार पर पुनर्गठित करने के लिये जेबीपी आयोग गठित हुुुुआ जिसने 1953 में भाषाई आधार पर राज्यों के गठन का सुझाव दिया, जिसके फल स्‍वरूप 1953 में सर्वप्रथम भाषा के आधार पर आंध्र प्रदेश का तेलुगु भाषी राज्य के तौर पर गठन किया गया, इसके बाद 22 दिसम्बर 1953 में प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग (States Re-organisation Commission) का गठन हुआ, इस अयोग के तीन सदस्‍य थे न्यायमूर्ति फजल अली, हृदयनाथ कुंजरू और केएम पाणिक्कर, इनके द्वारा दी गयी रिपोर्ट के अाधार पर 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम संसद ने पास किया और 14 राज्य व 6 केन्द्र शासित राज्य बने |
दूसरा पुनर्गठन 1960 में शुरू हुआ जिसमें बम्बई राज्य को विभाजित करके महाराष्ट्र और गुजरात का गठन हुआ। 1963 में नागालैंड गठित हुआ। 1966 में पंजाब का पुनर्गठन हुआ और उसे पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में तोड़ दिया गया। 1972 में मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा बनाए गए। 1987 में मिजोरम का गठन किया गया और केन्द्र शासित राज्य अरूणाचल प्रदेश और गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। वर्ष 2000 में उत्तराखण्ड, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आए।

भारत में राज्य पुनर्गठन की पूरी सूची :-
क्र.सं. राज्‍य राजधानी गठन आधिकारिक भाषा
1 अरुणाचल प्रदेश ईटानगर 20 फ़रवरी 1987 अंग्रेज़ी
2 असम दिसपुर 26 जनवरी 1950 असमीया
3 आन्‍ध्रप्रदेश हैदराबाद 1 अक्‍टूबर 1953 तेलुगू
4 उत्‍तर प्रदेश लखनऊ 26 जनवरी 1950 हिन्‍दी
5 उत्‍तराखण्‍ड देहरादून 9 नवम्‍बर 2000 हिन्‍दी
6 उडीसा भुुुवनेश्‍वर 26 जनवरी 1950 आेडिया
7 कर्नाटक बेंगलुरू 1 नवम्‍बर 1956 कन्‍नड
8 केरल तिरूवनन्‍तपुरम 1 नवम्‍बर 1956 मलयालम
9 गुजरात गॉधीनगर 1 मई 1960 गुजराती
10 गोवा पणजी 30 मई 1987 कोंकणी
11 छत्‍तीसगढ नया रायपुर 1 नवम्‍बर 2000 हिन्‍दी
12 जम्‍मू और कश्‍मीर श्री नगर 26 जनवरी 1950 उर्दू
13 झारखण्‍ड रॉची 15 नवम्‍बर 2000 हिन्‍दी
14 तमिलनाडु चेन्‍नई 26 जनवरी 1950 तमिल
15 तेलंगाना हैदराबाद 2 जून 2014 तेलुगू, उर्दू
16 त्रिपुरा अगरतला 21 जनवरी 1972 बंगाली, ककबरक, अंग्रेजी
17 नागालैण्‍ड कोहिमा 1 दिसम्‍बर 1963 अंग्रेजी
18 पंजाब चण्‍डीगढ 1 नवम्‍बर 1966 पंजाबी
19 पश्चिम बंगाल कोलकाता 26 जनवरी 1950 बंगाली
20 बिहार पटना 26 जनवरी 1950 हिन्‍दी
21 मणिपुर इम्‍फाल 21 जनवरी 1972 मणिपुरी
22 मध्‍यप्रदेश भोपाल 1 नवम्‍बर 1956 हिन्‍दी
23 महाराष्‍ट्र मुम्‍बई 1 मई 1960 मराठी
24 मिजोरम आइजोल 20 फरवरी 1987 अंग्रेजी, हिन्‍दी, मिजो
25 मेघालय शिलांग 21 जनवरी 1972 अंग्रेेेेजी
26 राजस्‍थान जयपुर 1 नवम्‍बर 1956 हिन्‍दी
27 हरियाणा चण्‍डीगढ 1 नवम्‍बर 1956 हिन्‍दी, पंजाबी
28 सिक्किम गोन्‍तोक 16 मई 1975 अंग्रेेेेजी
29 हिमाचल प्रदेश शिमला 25 जनवरी 1971 हिन्‍दी, अंग्रेजी

भारत के केन्‍द्र शासित प्रदेश और उनका गठन :-
केंंद्र शासित प्रदेश राजधानी गठन अधिकारिक भाषा
अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह – पोर्ट ब्लेय – 1 नवम्‍बर 1956 – हिन्दी, अंग्रेज़ी
चण्डीगढ़ – चण्डीगढ़ – 1 नवम्‍बर 1966 – अंग्रेजी
दमन और दीव – दमन – 30 मई 1987 – कोंकणी, गुजराती, हिन्दी, अंग्रेज़ी
दादरा और नगर हवेली – सिलवास – 11 अगस्त 1961- हिन्‍दी, गुजराती
पुदुच्चेरी – पुदुच्चेरी – 1 नवम्‍बर 1956 – तमिल, अंग्रेज़ी
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली – नई दिल्ली – 1 नवम्‍बर 1966 – हिन्‍दी
लक्षद्वीप – कवरत्ती – 1 नवम्‍बर 1956 – अंग्रेज़ी

भारत में तत्कालीन राजनैतिक परिदृश्य :-
उस वक़्त तीन श्रेणी के राज्य थे पहली श्रेणी में वे नौ राज्य थे जो तत्कालीन ब्रिटिश सरकार में गवर्नर के अधीन थे और जो अब निर्वाचित गवर्नरों और विधान पालिका द्वारा शाषित थे इनमें असम, बिहार, मध्य प्रदेश (मध्य प्रान्त और बिहार), मद्रास, उड़ीसा, पंजाब और उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बॉम्बे आते थे |
दूसरी श्रेणी उन राज्यों की थी जो पहले रियासतदारों के अधीन थे और जिन्हें अब राज प्रमुख और विधान पालिकाएं संभाल रही थीं इनमें मैसूर, पटियाला, पूर्वी पंजाब, हैदराबाद, राजपूताना के इलाक़े, सौराष्ट्र और त्रावनकोर शामिल थे |
तीसरी पंक्ति के राज्य वे थे जो पहले चीफ कमिश्नर या किसी राजा द्वारा शासित थे और अब राष्ट्रपति की अनुशंसा पर बने चीफ कमिश्नरों द्वारा शासित थे. इनमें अजमेर, भोपाल, बिलासपुर, कुर्ग, दिल्ली, हिमाचल, त्रिपुरा, कच्छ, मणिपुर और विन्ध्य प्रदेश थे |
और अंत में अंडमान निकोबार के द्वीप थे जो लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा शासित थे |

भारत में आयोग का प्रस्ताव :-
आयोग ने इन तीनों श्रेणियों को ख़त्म करके नए राज्य बनाने का प्रस्ताव दिया था. तत्कालीन मद्रास प्रान्त से तेलगु, कन्नड़, तमिल और मलयालम भाषाई बहुलता वाले इलाकों को अलग-अलग करके आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मद्रास और केरल को बनाना प्रस्तावित किया गया था. उधर, उत्तर में यानी हिंदी भाषाई इलाकों में राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बनाने का प्रस्ताव दिया गया था |
ठीक उसी प्रकार, पूर्व के राज्यों का गठन हुआ. उड़ीसा और जम्मू-कश्मीर में कोई परिवर्तन नहीं किया गया जबकि दिल्ली, मणिपुर और अंडमान निकोबार को केंद्र शासित प्रदेश माना गया |
पंजाब और पूर्वी पटियाला के इलाक़ों को मिलकर ‘पेपसु’ बनाया गया. पंजाबी नेता मास्टर तारा सिंह की पंजाबी सूबा बनने की ख्वाहिश पूरी नहीं हुई. पंजाब पहले से ही विभाजन के तंदूर पर पक रहा था उस तंदूर में आग कुछ और तेज़ हो गयी. इस नक़्शे से आप आयोग का प्रस्ताव समझ जायेंगे |

भारत में आयोग का बॉम्बे और विदर्भ :-
तत्कालीन बॉम्बे राज्य में से बनासकांठा जिले के आबू रोड, कन्नड़भाषी धारवाड़, बेलगाम, बीजापुर आदि को निकालकर अलग करने की बात कही गई और हैदराबाद के मराठीभाषी ओस्मानाबाद, औरंगाबाद, परभनी, नांदेड के साथ-साथ कुछ और सौराष्ट्र इलाकों को इसमें जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया. उधर, विदर्भ में मध्यप्रदेश के मराठी बहुल इलाक़ों जैसे नागपुर, यवतमाल, अमरावती, बुलढाणा, वर्धा, भंडारा आदि का समावेश होना था |

भारत में बॉम्बे सिटिज़न्स कमेटी और संयुक्त महाराष्ट्र परिषद की भिड़ंत :-
बॉम्बे सिटिज़न्स कमेटी व्यापारियों का गुट था जिसमें पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास और जेआरडी टाटा जैसे दिग्गज थे इनकी मांग थी कि बॉम्बे शहर को अलग रखकर एक पूर्ण राज्य के माफिक दर्ज़ा दिया जाए. इसके पीछे उनकी दलील थी कि बॉम्बे में देश भर के लोग रहते हैं यह भी कि यह बहु-भाषाई शहर है जिसमें मराठी बोलने वाले महज़ 43 फीसदी ही हैं और भी कई बातें कही गईं. जैसे कि बॉम्बे देश की आर्थिक राजधानी है और इसकी भौगोलिक स्थिति बाक़ी महाराष्ट्र से इसे अलग करती है कमेटी की मांग थी कि इसे एक छोटे भारत जैसे मॉडल के रूप में पेश किया जाना चाहिए |

भारत में सीमा आयोग :-
सीमा आयोग भारत की आज़ादी और विभाजन के पूर्व गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंट बेटन द्वारा जुलाई, 1947 में गठित किया गया आयोग था।
इस आयोग का कार्य मुस्लिम जनसंख्या के आधार पर भारत और पाकिस्तान के बीच पंजाब और बंगाल में विभाजन रेखा खींचना था।
सीमा आयोग में आठ निर्णायक सदस्य थे, चार ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ से और चार ‘मुस्लिम लीग’ के थे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के सदस्य किसी सहमति पर नहीं पहुंच पाए और 15 अगस्त की अंतिम तिथि निकट आ रही थी। अत: अंतिम निर्णय आयोग के अध्यक्ष सर साइरिल रेडक्लिफ़ द्वारा लिये गए।
दुर्भाग्य से 17 अगस्त को रेडक्लिफ़ अवॉर्ड की घोषणा के पहले और बाद में सांप्रदायिक दंगे और बलात विस्थापन हुआ।

General Notes
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