भारत की नदी घाटी परियोजनाएं

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भारत की नदी घाटी परियोजनाएं

भारत की प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएं :- भारत में समय समय पर नदियों से जुड़ी मत्वकांक्षी योजनाओं पर काम किया गया जिनसे भारत में पेयजल सिंचाई बिजली आदि की जरूरतों को पूरा किया जा सके। नदियों की घाटियो पर बडे-बडे बाँध बनाकर ऊर्जा, सिंचाई, पर्यटन स्थलों की सुविधाएं प्राप्त की जातीं हैं। इसीलिए इन्हें बहूद्देशीय नदी घाटी परियोजना कहते हैं। नदी घाटी योजना का प्राथमिक उद्देश्य होता है किसी नदीघाटी के अंतर्गत जल और थल का मानवहितार्थ पूर्ण उपयोग। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को ‘आधुनिक भारत का मंदिर’ कहा था।

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दामोदर नदी घाटी परियोजना :- दामोदर पश्चिम बंगाल तथा झारखंड में बहने वाली एक नदी है। इस नदी के जल से एक महत्वाकांक्षी पनबिजली परियोजना दामोदर घाटी परियोजना चलाई जाती है जिसका नियंत्रण डी वी सी करती है। यह भारत की एक प्रमुख नदी घाटी परियोजना हैं। 7 जुलाई, 1948 को स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देशीय परियोजना के रूप में ‘दामोदर नदी घाटी’ परियोजना अस्तित्व में आई। यह परियोजना भारत की अधिकतर परियोजनाओं की तरह अमेरिका की ‘टेनेसी घाटी परियोजना’ पर आधारित हैं, जो की जल-राशि का अधिकतम प्रयोग करने के लिये बनाई गयी है। इसका नियंत्रण डी. वी. सी. करती है। दामोदर नदी छोटा नागपुर की पहाड़ियों से निकलती है, इसकी सहायक नदियों में कोनार, बोकारो और बराकरप्रमुख हैं। ये नदियां गिरीडीह, हज़ारीबाग़ और बोकारो ज़िले से होकर बहती है। इस परियोजना का उद्देश्य दामोदर नदी पर बाढ़ का नियंत्रण, सिंचाई, विद्युत-उत्पादन, पारेषण व वितरण, पर्यावरण संरक्षण तथा वनीकरण, दामोदर घाटी के निवासियों का सामाजिक आर्थिक कल्याण एवं औद्योगिक और घरेलू उपयोग हेतु जलापूर्ति सुनिश्चित करना है। दामोदर घाटी परियोजना भारत की ऐसी पहली परियोजना है, जहाँ कोयला, जल और गैस तीनो स्रोतों सेविद्युत उत्पन्न की जाती है। यहीं मैथन में सर्वप्रथम भूमिगत विद्युत गृह बनाया गया है। इस महत्त्वपूर्ण परियोजना के अंतर्गत 8 बाँध और एक बड़ा बैराज़ बनाया गया है। यह क्रमशः बराकार नदी परमैथन बाँध, बालपहाड़ी पर तेलैया बाँध, दामोदर नदी पर पंचेत हिल, मैथन, ऐयर बर्मो बाँध, बोकारो नदी पर बोकारो बाँध, कोनार नदी पर कोनार बाँध तथा दुर्गापुर के निकट एक बड़ा बैराज़ बनाया गया है।

नर्मदा नदी घाटी परियोजना :- नर्मदा घाटी परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना के अंतर्गत कई बाँध और नहरें बनाई जानी हैं। नर्मदा भारत की 5वीं बड़ी नदी है, जो अमरकंटक की पहाड़ियों से निकलकर मैकाल पर्वत श्रृंखला से पश्चिम की ओर बहते हुए अरब सागर में मिल जाती है। यह नदी 87 प्रतिशत मध्य प्रदेश, 11 प्रतिशत गुजरात तथा 2 प्रतिशत महाराष्ट्र में बहती है, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सन 1985 में ‘नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण’ का गठन किया गया था। नर्मदा घाटी परियोजना के अंतर्गत कई बाँध और नहरें बनाई जानी हैं। इस परियोजना के पूरे हो जाने पर 15 लाख हेक्टअर भूमि की सिंचाई होगी और इससे लगभग 14500 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इस परियोजना में मध्य प्रदेश की सरकार द्वारा 29 बड़ी, 135 मध्यम और 3000 छोटी-बड़ी परियोजनाएँ सन 2025 तक पूर्ण की जानी हैं। नर्मदा घाटी के अंतर्गत निर्माणाधीन दो बड़े बाँध अधिक विवादास्पद हो गये हैं, पहला ‘इंदिरा सागर बाँध’ और दूसरा ‘सरदार सरोवर बाँध’।

तुंगभद्रा बाँध परियोजना :- तुंगभद्रा परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना के अंतर्गत तुंगभद्रा नदी पर तुंगभद्रा बाँध बनाया गया है। तुंगभद्रा नदी कृष्णा नदी की सहायक नदी है। इस नदी पर बनाया गया बाँध कर्नाटक में ‘होस्पेट’ नामक स्थान पर है। इस बाँध का निर्माण 1953 में पूरा हुआ था। यह बाँध तुंगभद्रा नदी पर एक बहुत बड़ा जलाशय बनाता है। बाँध से निकालने वाली नहरों से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के ज़िलों की सिंचाई होती है। हम्पी के निकट 8 मेगावाट के 9 विद्युत सयंत्र लगाए गये हैं, जो कुल मिलाकर 72 मेगावाट विद्युत उत्पन्न करते हैं।

नागार्जुन सागर बाँध परियोजना :- नागार्जुन सागर बाँध परियोजना भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य में स्थित एक प्रमुख नदी घाटी परियोजना हैं। इस बाँध को बनाने की परिकल्पना 1903 में ब्रिटिश राज के समय की गयी थी। 10 दिसम्बर 1955 में इस बाँध की नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी। नागार्जुन बाँध हैदराबाद से 150 किमी दूर, कृष्णा नदी पर स्थित है। इसका निर्माण 1966 में पूरा हुआ था, 4 अगस्त 1967 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा इसकी दोनों नहरों में पहली बार पानी छोड़ा गया था। यह भारत का सब से उँचा और लंबा बाँध है। इस बाँध से निर्मित नागार्जुन सागर झील दुनिया की तीसरी सब से बड़ी मानव निर्मित झील है। इस बाँध के द्वारा नलगोंडा, प्रकाशम, खम्मम, कृष्णा और गुंटूर ज़िलों की सिंचाई होती है। बाँध के निर्माण से प्राचीन बौद्ध शहर नागार्जुनकोंडा, जो की प्राचीन इक्ष्वाकु वंश की राजधानी थी, वह डूब गयी। यहाँ 110 मेगावाट की एक और 100 मेगावाट की सात जलविद्युत इकाइयाँ लगाई गयी हैं।

थीन बाँध परियोजना :- थीन बाँध परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। पंजाब के पठानकोट ज़िले में रावी नदी पर थीन बाँध बनाया गया है। इसको ‘रणजीत सागर बाँध’ के नाम से भी जाना जाता है। थीन बाँध का निर्माण सन 1982 में शुरू हुआ था तथा यह 1999 में बनकर पूरा हुआ था। इस परियोजना की निम्नलिखित इकाइयाँ हैं-
1) रणजीत सागर बाँध
2) रणजीत सागर बाँध प्रमुख सिंचाई योजना – जम्मू
3) रणजीत सागर बाँध प्रमुख सिंचाई योजना – पंजाब
4) रंजीत सागर जलाशय
5) रावी प्रमुख सिंचाई योजना
6) ऊपरी बारी दोआब नहर विद्युत गृह 1, 2, 3
7) ऊपरी बारी दोआब नहर – प्रमुख सिंचाई नहर
इस परियोजना से पंजाब, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर को लाभ मिलता है। यहाँ पर 150 मेगावाट की चार विद्युत इकाइयाँ लगाई गयी हैं।

धौली गंगा बाँध परियोजना :- धौली गंगा परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना में उत्तराखंड राज्य में धौली गंगा नदी पर ‘धौली-गंगा बाँध’ बनाकर 280 मेगावाट की विद्युत इकाई लगाई जायेगी। हिमालय के ऊपरी भाग में शारदा नदी के बेसिन में तीन मुख्य सहायक नदियां शामिल हैं- धौली गंगा, गोरी गंगा और पूर्वी राम गंगा। इन तीन नदियों की विद्युत संभाव्यता क्रमश: 1240 मेगावाट, 345 मेगावाट तथा 80 मेगावाट होने का अनुमान लगाया गया है। उच्चतर विद्युत संभाव्यता और बेहतर हाइड्रोलॉजिकल रिकार्ड कई वर्षों से धौली गंगा बेसिन के एक विस्तृत अध्ययन और विद्युत परियोजनाओं की एक श्रृंखला को विकसित करते हुए धौली गंगा नदी में उपलब्ध 2000 मीटर के हेड का उपयोग करने के लिए एक मास्टर प्लान को बनाए जाने में परिणत हुआ है। 280 मेगावाट की धौली गंगा (4×70 मेगावाट) परियोजना इस मास्टर प्लान की सबसे कम क्षमता वाली योजना है।

पार्वती घाटी बाँध परियोजना :- पार्वती घाटी परियोजना गुजरात, हरियाणा, राजस्थान एवं दिल्ली की सयुंक्त परियोजना है। इस परियोजना में हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में व्यास की सहायक नदीपार्वती पर 2050 मेगावाट की विद्युत इकाईयाँ लगाए जाने का प्रस्ताव है।

मयूराक्षी बाँध परियोजना :- मयूराक्षी परियोजना पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और वीरभूमि ज़िले की भयानक बाढ़ से निपटने के लिए स्थापित की गयी परियोजना है, छोटा नागपुर पठार से निकलने वाली नदियाँ पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर जाती हैं। इसमें मयूराक्षी प्रमुख नदी है। वर्षा के जल से इस नदी का जलस्तर भयानक रूप से बढ़ जाता है। इसीलिए इस नदी पर झारखंड के दुमका के निकट मसनजोर बाँध बनाया गया है। मसनजोर बाँध को ‘कनाडा बाँध’ भी कहते हैं, क्योंकि इस बाँध को बनाने के लिए कनाडा ने वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई थी। मसनजोर बाँध के नीचे की ओर तिलपाड़ा बैराज़ बनाया गया है। यहाँ पर 40X40 मेगावाट की दो विद्युत इकाइयाँ लगाई गयी हैं।

नाथपा झाकड़ी बाँध जलविद्युत परियोजना :- नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग २२ – हिन्दुस्तान तिब्बत मार्ग पर, सतलुज नदी पर स्थित है। इस परियोजना को मई,2004 में कमीशन किया गया था तथा आधिकारिक तौर पर 28 मई,2005 को प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। नाथपा झाकड़ी पनबिजली स्टेशन की क्षमता 1500 मेगावाट है और यह देश का सबसे बड़ा जलविद्युत प्लांट है, नाथपा झाकड़ी प्लांट प्रति वर्ष 6950.88 (6612) मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्लांट से विद्युत का आबंटन उत्तर भारतीय राज्यों हरियाणा, हि.प्र., पंजाब, जम्मू एवं कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा दिल्ली व चंडीगढ़ के सभी शहरों को होता है। इस परियोजना में ‘नाथपा झाकड़ी बाँध’ बनाया जा रहा है। परियोजना में 250X6=1500 मेगावाट की विद्युत इकाइयाँ लगाई गयी हैं। यह परियोजना भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। यहाँ पर 8.5 मीटर व्यास और 27 कि.मी. लंबी एक सुरंग बनाई गयी है, जो भारत की और संभवतः एशिया की भी सबसे लंबी सुरंग है।

फरक्का बाँध परियोजना :- फरक्का परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजना है। यह परियोजना सन 1963 में शुरू हुई थी और 1975 में पूरी हुई। यह परियोजना गंगा और हुगली नदी प्रणाली की नौगम्यता बढ़ाने के लिए और गंगा नदी का जल हुगली नदी में मिलाने के लिए बनाई गई थी। इस परियोजना में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में फरक्का के निकट 2225 मीटर लंबा फरक्का बैराज, जंगीपुर में 213 मीटर लंबा बैराज, एक कैनाल हेड रेग्युलेटर जल को मोड़ने के लिए बनायी गई है। एक फीडर कैनाल इलाहाबाद-हल्दिया अंतर्देशीय जलमार्ग-1 पर भागीरथी नदी की जल क्षमता बढ़ाने के लिए बनाई गयी है। इस बैराज में 109 गेट हैं और यहाँ र्राइव 60 नहरे निकली गयी हैं। इस बैराज से ‘फरक्का सुपर थर्मल पावर स्टेशन’ को जल की आपूर्ति होती है। फरक्का बाँध का निर्माण कोलकाता बंदरगाह को ‘गाद’ से मुक्त कराने के लिये किया गया था, जो की 1950 से 1960 तक इस बंदरगाह की प्रमुख समस्या थी। ग्रीष्म ऋतु में हुगली नदी के बहाव को निरंतर बनाये रखने के लिये गंगा नदी के पानी के एक बड़े हिस्से को फरक्का बाँध द्वारा हुगली नदी में मोड़ दिया जाता है। इस पानी के वितरण के कारण बांग्लादेश और भारत में लंबा विवाद चला। गंगा नदी के प्रवाह की कमी के कारण बांग्लादेश जाने वाले पानी की लवणता बड़ जाती थी और मछली पालन, पेयजल, स्वास्थ्य और नौकायान प्रभावित हो जाता था। मिट्टी में नमी की कमी के चलते बांग्लादेश के एक बड़े क्षेत्र की भूमि बंजर हो गयी थी। इस विवाद को सुलझाने के लिये भारत सरकार और बांग्लादेश सरकार दोनों ने आपस में समझौता करते हुए ‘फरक्का जल संधि’ की रूपरेखा रखी था।

बगलिहार बाँध परियोजना :- बगलिहार परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजना है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में दूसरी विद्युत परियोजना है, जो डोडा क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर बहने वाली चिनाब नदी पर स्थित है। 900 मेगावाट की इस विद्युत परियोजना की 450 मेगावाट वाली पहली इकाई का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्रीमनमोहन सिंह ने किया था। बगलिहार परियोजना का निर्माण चिनाब नदी पर किया जा रहा है, जो कश्मीर से पाकिस्तान की ओर बहती है। यह परियोजना विवादों में भी रही है, वर्ष 2005 में पाकिस्तान ने बगलिहार बांध के निर्माण और जलविद्युत परियोजना को रोकने के लिए ‘विश्व बैंक’ की मध्यस्थता की मांग की थी। बाद में विश्व बैंक ने एक विशेषज्ञ को नियुक्त किया था और परियोजना में मामूली बदलाव के साथ भारत को काम आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी। इस परियोजना की अनुमानित लागत एक अरब डॉलर है। जम्मू-कश्मीर राज्य की पहली ‘डुलहस्ती जलविद्युत परियोजना’ का निर्माण एनएचपीसी ने किया था, जिसका उद्घाटन भी अप्रैल में मनमोहन सिंह जी ने ही किया था।

माताटीला बाँध परियोजना :- माताटीला परियोजना उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सयुंक्त परियोजना है। यह ललितपुर के निकट ‘तलबाहाट’ में स्थित है। यह भारत की एक प्रमुख नदी घाटी परियोजना है। माताटीला बाँध सन 1958 में बेतवा नदी पर बनाया गया था। देवगढ़ से 93 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह जगह लगभग बीस वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। इस जगह पर काफ़ी संख्या में छोटे-छोटे पर्वत हैं, जो इस जगह की खूबसूरती को और अधिक बढ़ाते हैं। इस परियोजना के अंतर्गत निर्मित माताटीला बाँध की चार मुख्य इकाइयाँ हैं-
1) भंडेर नहर, मुख्य सिंचाई परियोजना – मध्य प्रदेश
2) माताटीला बाँध, मुख्य सिंचाई परियोजना – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश
3) माताटीला विद्युत गृह
4) माताटीला जलाशय
5) माताटीला परियोजना के अंतर्गत 10.2×3=30.6 मेगावाट की विद्युत इकाइयाँ लगाई गयी हैं।

पारापलर बाँध सिंचाई परियोजना :- पारापलर सिंचाई परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजना है। इस परियोजना के अंतर्गत पारापलर नदी पर तमिलनाडु के डिंडीगुल ज़िले में सन 1974 में सिंचाई के उद्देश्य से बाँध का निर्माण किया गया था।

बास्पा बाँध परियोजना :- बास्पा परियोजना हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में सतलुज नदी की सहायक बास्पा नदी पर बनाई गयी है। यह परियोजना बास्पा नदी के जल से तीन चरणों में कार्यान्वित की गई है, जिससे 300 मेगावाट विद्युत पैदा की जा रही है। इस परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए निजी क्षेत्र को दिया गया है। परियोजना के तीनों चरणों से बिजली का उत्पादन मई/जून, 2003 से शुरू हुआ।

Rajasthan Art And Culture Notes

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