भारत की जनसंख्या संबंधित

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भारत की जनसंख्या संबंधित

भारत की जनसंख्या संबंधित :- हाल ही में, जनसंख्या नियंत्रण को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई। इसमें केंद्र सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई। याचिकाकर्ता की दलील है कि देश में अपराध, प्रदूषण बढ़ने और संसाधनों तथा नौकरियों की कमी का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है, साथ ही याचिका में न्यायमूर्ति वेंकटचलैया की अगुवाई में गठित राष्ट्रीय संविधान समीक्षा आयोग की सिफारिशें लागू करने का भी अनुरोध किया गया। अदालत ने इस याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। स्टेट ऑफ़ वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट-2019 हाल ही में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी UNFPA द्वारा जारी स्टेट ऑफ़ वर्ल्ड पॉपुलेशन-2019 रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2010 से 2019 के बीच भारत की आबादी औसतन 1.2 फीसदी बढ़ी है, जो चीन की सालाना वृद्धि दर के दोगुने से भी ज़्यादा है, साल 2019 तक, भारत की जनसंख्या 1.36 बिलियन तक होने की संभावना है।
रिपोर्ट में शामिल विश्लेषण के अनुसार, महिलाओं के पास प्रजनन और यौन अधिकार न होने के कारण उनके शिक्षा, आय और सुरक्षा पर नकारात्मक असर पड़ता है।
इस रिपोर्ट में महिलाओं और लड़कियों के संघर्ष और साथ ही उन पर जलवायु आपदाओं के कारण होने वाली दिक्कतों पर भी प्रकाश डाला गया है।

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क्या है जनसंख्या और जनसंख्या वृद्धि :- जीव विज्ञान में, विशेष प्रजाति के अंत: जीव प्रजनन के संग्रह को जनसंख्या कहते हैं। समाजशास्त्र में जनसंख्या को ‘मनुष्यों के संग्रह’ के तौर पर परिभाषित किया गया है। किसी क्षेत्र में, समय की किसी निश्चित अवधि के दौरान वहां बसे हुए लोगों की संख्या में बदलाव होता रहता है। इसे ही जनसंख्या वृद्धि यानी जनसंख्या परिवर्तन कहा जाता है, ये धनात्मक भी हो सकता है और ऋणात्मक भी।

आज़ादी के बाद भारत की जनसंख्या नीति :- भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने सबसे पहले 1952 में परिवार नियोजन कार्यक्रम को अपनाया। प्रथम पंचवर्षीय योजना में ही बढ़ती आबादी को विकास के बाधक के तौर पर चिन्हित किया गया और तभी से विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कोशिश की जाती रही है, भारत में सबसे पहले जनसंख्या नीति बनाने का सुझाव साल 1960 में एक विशेषज्ञ समूह ने दिया था।
साल 1976 में देश की पहली जनसंख्या नीति की घोषणा की गई, बाद में 1981 में इस जनसंख्या नीति में कुछ संशोधन भी किए गए, इस जनसंख्या नीति के तहत जन्म दर तथा जनसंख्या वृद्धि में कमी लाना, विवाह की न्यूनतम आयु में वृद्धि करना, परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करना और महिला शिक्षा पर विशेष जोर देने का लक्ष्य रखा गया था।
इसके बाद फरवरी 2000 में सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 की घोषणा की। ये नीति डॉक्टर एम. एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में गठित एक विशेषज्ञ दल की रिपोर्ट पर आधारित है, इस जनसंख्या नीति का प्रमुख उद्देश्य प्रजनन तथा शिशु स्वास्थ्य की देखभाल के लिए बेहतर सेवातंत्र की स्थापना तथा गर्भ निरोधकों और स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे की आवश्यकताएं पूरी करना है। इसका दीर्घकालीन लक्ष्य जनसंख्या में साल 2045 तक स्थायित्व प्राप्त करना है, आबादी पर काबू पाने के लिहाज़ से देश में साल 1996 से काहिरा मॉडल लागू है जिसके तहत आबादी को घटाने के लिए आम जनता पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाता है, बल्कि शिक्षा के ज़रिए उनमें छोटे परिवार के प्रति एहसास जगाया जाता है। पूरी दुनिया में अभी यही फार्मूला लागू है।

राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग :- मई 2000 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन किया गया। आयोग का काम होगा –
1. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा करना, 2. निगरानी करना और निर्देश देना, 3. स्वास्थ्य संबंधी, शैक्षणिक, पर्यावरणीय और विकास कार्यक्रमों में सहक्रिया को बढ़ावा देना और 4. कार्यक्रमों की योजना बनाने व क्रियान्वयन करने में अन्तरक्षेत्रीय तालमेल को बढ़ावा देना इस आयोग के अंतर्गत, एक राष्ट्रीय जनसंख्या स्थिरता कोष की भी स्थापना की गई। बाद में इस कोष को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत स्थानांतरित कर दिया गया।

भारत में जनगणना से जुड़े कुछ तथ्य: जनगणना 2011 के मुताबिक़ :-
1) कुल जनसंख्या : 1210854977
2) पुरुष जनसंख्या की हिस्सेदारी : 51.47%
3) महिलाओं की हिस्सेदारी : 48.53%
4) 0-6 साल के बच्चों की हिस्सेदारी : 13.6%
5) दशकीय वृद्धि दर : 17.7%
6) वार्षिक वृद्धि दर : 1.64%
7) लिंगानुपात : 943/1000
8) बाल लिंगानुपात : 919/1000
9) कुल साक्षरता दर : 73%
10) पुरुष साक्षरता दर : 80.9%
11) महिला साक्षरता दर : 64.6
12) जनसंख्या घनत्व (2011) : 382/km square
13) जनसंख्या घनत्व (2001) : 325
14) ग्रामीण जनसंख्या की हिस्सेदारी : 68.84%
15) शहरी जनसंख्या की हिस्सेदारी : 31.14
16) जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य : उत्तर प्रदेश
17) जनसंख्या की दृष्टि से सबसे छोटा राज्य : सिक्किम
18) शिशु मृत्यु दर (2016) : 34
19) जन्म दर (2016) : 20.4
20) मृत्यु दर (2016) : 6.4
21) मातृ मृत्यु दर (2014-2016) : 130
चौथे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण यानी एनएफएचएस-4, 2015-16 के आंकड़ों के मुताबिक़ पहली बार भारत की कुल प्रजनन दर घटकर (टीएफआर) 2.18 रह गई है, जो वैश्विक प्रतिस्थापन दर 2.30 से कम है। साल 2017 में संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामले विभाग के जनसंख्या प्रकोष्ठ ने ‘द वर्ल्ड पापुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स: द 2017 रिवीजन’ रिपोर्ट जारी की थी। इसमें अनुमान लगाया गया था कि भारत की आबादी लगभग सात वर्षों में चीन से भी ज़्यादा हो जाएगी।

जनसंख्या वृद्धि के कारण :- जीवन प्रत्याशा में वृद्धि, पारिवार नियोजन की कमी, बाल विवाह, अशिक्षा, धार्मिक कारण और रूढ़िवादिता, गरीबी, अवैध प्रवासी, जनसंख्या के फायदे, जनसंख्या वृद्धि को अगर एक अलग नजरिए से देखा जाए तो ये भारत जैसे देशों के लिए बहुत ही कारगर साबित हो सकती है।

जनसांख्यिकीय लाभांश :- भारत में जनसांख्यिकीय लाभ सबसे चर्चित लफ्ज़ है, जिसका मतलब है कि एक देश की कुल जनसंख्या में कामकाजी उम्र की आबादी का अनुपात ज्यादा है। ये लोग आर्थिक विकास में व्यापक योगदान कर सकते हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत की क़रीब आधी आबादी ऐसी है जिसकी उम्र 25 साल से कम है। ऐसे में भारत को इस बड़ी आबादी से लाभ मिलेगा।

मानव संसाधन में बढ़ोत्तरी :- अगर भारत मानव संसाधन का बेहतर तरीके से उपयोग करे तो ये आर्थिक तौर पर बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। मसलन कुशल श्रम, मानव संसाधन का निर्यात, जनांकिकीय लाभांश और सस्ता लेबर जैसे कारकों का लाभ उठाया जा सकता है, ज़्यादा जनसंख्या मतलब बड़ा बाजार विदेशी कंपनियों के लिए भारत एक बहुत ही अनुकूल देश है जहां पर उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक आसानी से एक जगह मिल जाता है।

शक्तिशाली सेना :- अगर किसी देश में पर्याप्त रुप से मानव संसाधन मौज़ूद है तो सेना का शक्तिशाली होना एक सामान्य बात है। जनसँख्या के मामले में भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेना है।

जनसंख्या वृद्धि के नुकसान :- भारत में जनसंख्या विस्फोट के कारण बेरोजगारी, खाद्य समस्या, कुपोषण, प्रति व्यक्ति निम्न आय, निर्धनता में वृद्धि और कीमतों में वृद्धि जैसी दिक्कतें उभरकर सामने आयीं हैं। इसके अलावा कृषि विकास में बाधा, बचत तथा पूंजी निर्माण में कमी, जनोपयोगी सेवाओं पर अधिक व्यय, अपराधों में वृद्धि, पलायन और शहरी समस्याओं में वृद्धि जैसी दूसरी समस्याएं भी पैदा हुई हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है। देश में पूंजीगत साधनों की कमी के कारण रोजगार मिलने में मुश्किलें आ रही हैं।

जनसंख्या को स्थिर करने के लिये सरकार द्वारा उठाये गए क़दम :- परिवार नियोजन कार्यक्रम, गर्भ निरोधक दवाइयों तक बेहतर पहुँच, परिवार नियोजन सेवाओं के लिए कुशल कर्मियों की बढ़ोत्तरी और निजी/गैर-सरकारी संगठनों को बढ़ावा देना जैसे क़दम सरकार द्वारा उठाये जा रहे हैं, आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भ निरोधक दवाइयों की होम-डिलीवरी योजना और संस्थागत डिलीवरी को बढ़ावा देना जैसे कुछ प्रयास भी किये जा रहे हैं।

याचिका में क्या कहा गया है :- एनसीआरडब्ल्यूसी ने दो साल तक काफी प्रयास और व्यापक चर्चा के बाद संविधान में अनुच्छेद 47ए शामिल करने और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था, एनसीआरडब्ल्यूसी की सिफारिश पर मनरेगा, राईट टू एजुकेशन, राईट टू इनफार्मेशन और राईट टू फूड जैसे महत्वपूर्ण कानून बनाये गए लेकिन जनसंख्या नियंत्रण कानून पर संसद में चर्चा भी नहीं हुई, इस आयोग ने मौलिक कर्तव्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया था। जिसे आज तक लागू नहीं किया गया, यदि 2004 में भाजपा की सरकार बनती तो अटल जी द्वारा बनाये गए संविधान समीक्षा आयोग की सिफारिशों पर संसद में जरुर बहस होती और जनसंख्या नियंत्रण कानून भी बनाया जाता।
अब तक संविधान में 125 बार संशोधन हो चुका है, सैकड़ों नए कानून लागू किए गए लेकिन जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाया गया जिसकी देश को अत्यंत आवश्यकता है और जिससे भारत की 50 प्रतिशत से अधिक समस्याएं दूर हो सकती हैं, केंद्र सरकारी नौकरियों, सहायता एवं सब्सिडी के लिए दो बच्चों का नियम बना सकता है और इसका पालन नहीं करने पर मतदान का अधिकारी, चुनाव लडऩे का अधिकार, सम्पत्ति का अधिकार, नि:शुल्क आश्रय का अधिकार, नि:शुल्क कानूनी सहायता का अधिकार जैसे कानूनी अधिकार वापस लिए जा सकते हैं, यदि संसाधनों की बात करें तो भारत के पास कृषि योग्य भूमि दुनिया की मात्र 2% है, पीने योग्य पानी मात्र 4% है और जनसंख्या दुनिया की 20% है, यदि चीन से तुलना करें तो भारत का क्षेत्रफल चीन का लगभग एक तिहाई है और जनसंख्या वृद्धि की दर चीन की तीन गुना है, चीन में प्रति मिनट 11 बच्चे और भारत में प्रति मिनट 33 बच्चे पैदा होते हैं।

जनसंख्या वृद्धि की समस्या के लिए क्या उपाय हो :- परिवार नियोजन, विवाह के उम्र में वृद्धि: बेहतर क्रियान्वयन, संतुलित अनुपात, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, भूमि का उचित उपयोग, शिक्षा और जागरूकता की आवश्यकता: महिला शिक्षा पर विशेष जोर, उचित औद्योगीकरण, बेहतर सरकारी नीतियां, परिवार नियोजन को बढ़ावा देना

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