आत्माराम पुरस्कार

आत्माराम पुरस्कार

आत्माराम पुरस्कार क्या है , आत्माराम पुरस्कार को किस क्षेत्र में दिया जाता है , आत्माराम का जन्म और शिक्षा , आत्माराम के शोध कार्य , आत्माराम के विचार में गांधीवादी विज्ञानी , आत्माराम के सम्मान और पुरस्कार , आत्माराम की मृत्यु , राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा बालेन्दु शर्मा दाधीच को आत्माराम पुरस्कार से सम्मानित , आत्माराम पुरस्कार दिये गये विद्वंनो की लिस्ट ,

आत्माराम पुरस्कार क्या है :-
आत्माराम पुरस्कार भारत का एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो प्रसिद्ध वैज्ञानिक आत्माराम की स्मृति में दिया जाता है। यह पुरस्कार केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा प्रदान किये जाने वाले प्रमुख पुरस्कारों में से एक है। यह पुरस्कार वैज्ञानिक एवं तकनीकी साहित्य तथा उपकरण विकास के क्षेत्र में व्यक्ति के उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। आत्माराम पुरस्कार ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’, भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार के अंतर्गत सम्मानित व्यक्ति को एक लाख रुपये की राशि उसके सम्मान स्वरूप प्रदान की जाती है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष दो लोगों को प्रदान किया जाता है।

आत्माराम पुरस्कार को किस क्षेत्र में दिया जाता है :-
डॉ. आत्माराम का जन्म- 12 अक्टूबर, 1908, बिजनौर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। डॉ. आत्माराम अर्थपरक वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी के पक्षधर एक भारतीय वैज्ञानिक थे, जिनका चश्मे के काँच के निर्माण में सराहनीय योगदान रहा था। इनकी स्मृति में ‘केन्द्रीय हिन्दी संस्थान’ द्वारा ‘आत्माराम पुरस्कार’ दिया जाता है। आत्माराम जी विज्ञान की शिक्षा अपनी भाषा में देने पर जोर देते थे। उनके जीवन में इतनी सादगी थी कि लोग सम्मान के साथ उन्हें गांधीवादी विज्ञानी कहा करते थे।

आत्माराम का जन्म और शिक्षा :-
प्रसिद्ध वैज्ञानिक और औद्यौगिक अनुसंधानशालाओं के महानिदेशक डॉ. आत्माराम का जन्म 12 अक्टूबर सन 1908 में उत्तर प्रदेश राज्य के बिजनौर ज़िले में पीलाना नामक स्थान पर हुआ था। आत्माराम जी ने अपनी शिक्षा के अंतर्गत बी.एससी. की डिग्री कानपुर से तथा एम.एससी. और पी.एचडी. इलाहाबाद से की।

आत्माराम के शोध कार्य :-
विज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने के बाद आत्माराम ने कांच और सेरोमिक्स पर शोध आरंभ किया। ऑप्टिकल कांच अत्यंत शुद्ध कांच होता है और उसका उपयोग सूक्ष्मदर्शी और विविध प्रकार के सैन्य उपकरण बनाने में किया जाता है। भारत में यह कांच जर्मनी से आयात होता था। इस पर प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा व्यय होती थी।
डॉ. आत्माराम ने बड़ी लगन के साथ शोध करके भारत में ही ऐसा कांच बनाने की विधि का अविष्कार कर लिया। इससे न केवल देश की आत्मनिर्भरता बढ़ी वरन औद्योगिक क्षेत्र में उसके सम्मान में भी वृद्धि हुई। 1967 में आत्माराम जी को देश की प्रमुख वैज्ञानिक संस्था ‘वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद’ का महानिदेशक बनाया गया। डॉ. आत्माराम विज्ञान की शिक्षा अपनी भाषा में देने पर जोर देते थे। उन्होंने स्वयं लिखा था |
विद्यार्थि जीवन में अंग्रेज़ी का अभ्यास कम होने के कारण कैमिस्ट्री मेरी समझ में नहीं आती थी, परंतु जब एक बार डॉ. फूलदेव सहाय वर्मा ने रसायन विज्ञान की मूल बातें हिंदी में समझा दीं तो मेरी गाड़ी चल पड़ी।

आत्माराम के विचार में गांधीवादी विज्ञानी :-
उनके अनुसंधान को देखते हुए सोवियत रूस के टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ने उन्हें ‘डॉक्टर ऑफ़ टेक्नोलोजी’ की उपाधि दी थी। डॉ. आत्माराम के जीवन में इतनी सादगी थी कि लोग सम्मान के साथ उन्हें ‘गांधीवादी विज्ञानी’ कहा करते थे।

आत्माराम के सम्मान और पुरस्कार :-
1. शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (1959)
2. पद्म श्री (1959)

आत्माराम की मृत्यु :-
6 फ़रवरी, 1983 ई. को देश के महान वैज्ञानिक आत्माराम जी का निधन हो गया।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा बालेन्दु शर्मा दाधीच को आत्माराम पुरस्कार से सम्मानित :-
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने माइक्रोसॉफ्ट में कार्यरत वरिष्ठ तकनीकविद और पूर्व संपादक बालेन्दु शर्मा दाधीच को प्रतिष्ठित ‘आत्माराम पुरस्कार’ से सम्मानित किया। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया गया।
दाधीच को यह पुरस्कार विज्ञान और प्रौद्योगिकी के जरिए हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने के लिए दिया गया है।
बता दें कि इस पुरस्कार के तहत मानपत्र और एक लाख रुपए की राशि दी जाती है और यह सम्मान मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय हिंदी संस्थान की ओर से प्रदान किया जाता है।
समारोह में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और अनेक गणमान्य हस्तियां मौजूद थीं।
बालेन्दु शर्मा दाधीच सूचना प्रौद्योगिकी और न्यू मीडिया के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम हैं। हिंदी भाषा में तकनीकी सोच को आगे बढ़ाने और सूचना तकनीक के विविध पहलुओं को रहस्यजाल से मुक्त करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंदी सॉफ्टवेयर और वेब सेवाओं के विकास, हिंदी में न्यू मीडिया (वेब पत्रकारिता) को प्रोत्साहित करने, तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन के लिए जाने-पहचाने जाने वाले दाधीच पहले भी अनेक पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किए जा चुके हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह और गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा भी उन्हें हिंदी भाषा के प्रति तकनीकी माध्यमों से उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित कर चुके हैं।

आत्माराम पुरस्कार दिये गये विद्वंनो की लिस्ट :-
क्रम सम्मानित विद्वान
श्री राम चरण मेहरोत्रा
श्री गुणाकर मुले
डॉ. बृजमोहन
डॉ जंयत नारलीकर
डॉ. ओम विकास
प्रो. डी. एस. कोठारी
डॉ. सत्यप्रकाश सरस्वती
प्रो. पी. एन. श्रीवास्तव
डॉ. नन्दलाल सिंह
डॉ. शिवप्रसाद कोष्टा
प्रो. एम. जी. के. मेनन
डॉ. शिवगोपाल मिश्र
प्रो.अजित राम वर्मा
डॉ. रमेश दत्त शर्मा
श्री हरीश अग्रवाल
श्री प्रेमानन्द चंदोला
श्री शुकदेव प्रसाद
श्री तुरशन पाल पाठक
श्री शुकदेव प्रसाद
श्री दयानन्द पंत
प्रो. सूरजभान सिंह
डॉ. विश्वमोहन तिवारी
डॉ. ब्रज किशोर शर्मा
डॉ. यतीश अग्रवाल
डॉ विष्णुदत्त शर्मा
डॉ. महाराज नारायण मेहरोत्रा
डॉ. महाराज नारायण मेहरोत्रा
डॉ. गोपाल काबरा
श्री श्याम सुन्दर शर्मा
डॉ. गिरीश चंद्र सक्सैना
डॉ. राय अवधेश कुमार श्रीवास्तव
श्री अनुपम मिश्र
श्री जगदीश सक्सेना
डॉ. राकेश कुमार अवस्थी एवं श्री दिलीप भाटिया (संयुक्त रूप में)
श्री देवेन्द्र मवाड़ी
डॉ. महेंद्र मधुप
श्री खड्ग सिंह वल्दिया
श्रीमती रेखा अग्रवाल एवं श्री प्रदीप शर्मा (संयुक्त रूप में)
डॉ.दुर्गादत्त ओझा एवं डॉ. सुबोध महंती (संयुक्त रूप में)
डॉ.श्रीमती विनीता सिंघल एवं डॉ. मनोज पटैरिया (संयुक्त रूप में)
प्रो. यशपाल
मुहम्मद ख़लील
श्री सुभाष लखेड़ा
श्री नरेंद्र के. सहगल
श्री अनिल कुमार चतुर्वेदी
श्री काली शंकर
श्री विजय कुमार मल्होत्रा
श्री महेश डी. कुलकर्णी |

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